Time Management In Hindi (clock).

टाइम मैनेजमेंट के 10 अहम सिद्धांत ; ऐसे करे समय का उपयोग – Time Management In Hindi

Time Management In Hindi

दोस्तो एक महान विचारक ने कहा है की आधुनिक औद्योगिक युग की सबसे प्रमुख मशीन भाप का इंजन नहीं, बल्कि घड़ी है। क्योंकि हर दिन समय जो छोटे छोटे अंतराल देता है, उनमें बहुत कुछ किया जा सकता है, जिन्हे अधिकांश लोग बर्बाद कर देते है। यदि आप समय का मूल्य नहीं जानते है तो आपका जन्म शोहरत के लिए नहीं हुआ है। अमीर लोगो का ओर अमीर बनने का केवल यही कारण है की वे समय में निवेश करते है और गरीब लोग धन में निवेश करते है इसलिए वे गरीब ही रह जाते है।

टाइम मैनेजमेंट के 10 सिद्धांत बताने से पहले हम तीन सवालों से इसकी शुरुआत करना चाहेंगे। पहला प्रश्न, आजकल समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है, दूसरा प्रश्न?, आपके पास दरअसल कितना समय है?, तीसरा प्रश्न, आपका समय कितना कीमती है ?

आजकल समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है-

क्या आपने कभी सोचा है कि आजकल हमें समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है? समय पर काम न करने या होने पर हम झल्ला जाते हैं, आगबबूला हो जाते है, चिढ़ जाते हैं, तनाव में आ जाते हैं। समय की कमी के चलते हम लगभग हर पल जल्दबाज़ी और हड़बड़ी में रहते हैं।

इस चक्कर में हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, लोगों से हमारे संबंध खराब हो जाते हैं, हमारा मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है और कई बार तो दुर्घटनाएँ भी हो जाती हैं। समय की कमी हमारे जीवन का एक अप्रिय और अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।

क्या आपने कभी यह बात सोची है : हमारे पूर्वजों को कभी टाइम मैनेजमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ी, तो फिर हमें क्यों पड रही है ? क्या हमारे पूर्वजों को दिन में 48 घंटे मिलते थे और हमें केवल 24 घंटे ही मिल रहे हैं ? आप भी जानते हैं और मैं भी जानता हूँ कि ऐसा नहीं है! हर पीढ़ी को एक दिन में 24 घंटे का समय ही मिला है।

लेकिन बीसवीं सदी की शुरुआत से हमारे जीवन में समय कम पड़ने लगा है और यह समस्या दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। बड़ी अजीब बात है, क्योंकि बीसवीं सदी की शुरुआत से ही मनुष्य समय बचाने वाले नए-नए उपकरण बनाता जा रहा है।

आपके पास दरअसल कितना समय है-

विधाता ने किसी को बुद्धि ज्यादा दी है, किसी को कम दी है। किसी को दौलत ज्यादा दी है, किसी को कम दी है। लेकिन समय उसने सबको बराबर दिया है : एक दिन में 24 घंटे। समय ही एकमात्र ऐसी दौलत है, जिसे आप बैंक में जमा नहीं कर सकते। समय का गुज़रना आपके हाथ में नहीं होता। यह तो घड़ी की सुई के साथ लगातार आपके हाथ से फिसलता रहता है।

आपके हाथ में तो बस इतना रहता है कि आप इस समय का कैसा उपयोग करते हैं। अगर सदुपयोग करेंगे, तो अच्छे परिणाम मिलेंगे; अगर दुरुपयोग करेंगे, तो बुरे परिणाम मिलेंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे पास कहने को तो 24 घंटे होते हैं, लेकिन वास्तव में इतना समय हमारे हाथ में नहीं होता। सच तो यह है कि समय के एक बड़े हिस्से पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता ।

8 घंटे नींद में चले जाते हैं और 2 घंटे खाने-पीने, तैयार होने एवं नित्य कर्म आदि में चले जाते हैं। यानी हमारे हाथ में दरअसल 14 घंटे का समय ही होता है। दूसरे शब्दों में, जीवन में सिर्फ 58 प्रतिशत समय पर हमारा नियंत्रण संभव है, जबकि 42 प्रतिशत समय हमारे। नियंत्रण से बाहर होता है। सुविधा की दूष्टि से यह मान लें कि 40 प्रतिशत समय पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, जबकि 60 प्रतिशत समय पर होता है।

आपका समय कितना कीमती है-

कहा जाता है, ‘समय ही धन है।’ परंतु यह कहावत पूरी तरह सच नहीं है। सच तो यह है कि समय सिर्र संभावित धन है। अगर आप अपने समय का सदुपयोग करते हैं, तभी आप धन कमा सकते हैं। दूसरी ओर, अगर आप अपने समय का दुरुपयोग कुरते हैं, तो आप धन कमाने की संभावना को गँवा देते हैं।

टाइम मैनेजमेंट के 10 अहम सिद्धांत ; ऐसे करे समय का उपयोग

1.समय की लाँग बुक रखे-

जिस तरह आप पैसे का बजट बनाते है, उसी तरह समय का भी बजट बनाएँ। बजट बनाने के लिए आपको यह हिसाब लगाना होता है कि आपका पैसा कहाँ खर्च हो रहा है। समय के मामले में भी यही नीति अपनाएँ। एक डायरी लें और एक सप्ताह तक यह रिकॉर्ड रखें कि आप किस काम में कितना समय खर्च कर रहे हैं।

ड्राइवरों की भाषा में इसे लॉँग बुक कहा जाता है, जिसमें वे लिखते हैं कि गाड़ी कितने किलोमीटर चली और कहाँ तक चली। समय की अपनी लाॉँग बुक में आप जितना बारीक हिसाब रखेंगे, आपको उतना ही ज्यादा फ़ायदा होगा। और हाँ, लॉँग बुक के पहले कॉलम में गतिविधि के बजाय घंटे लिखें, ताकि कोई महत्वपूर्ण अंतराल न छूट पाए :

सुबह 6-6:30उठना, चाय बनाना, नित्य कर्म
सुबह 6:30-7पड़ोसी से बातचीत करना, अखबार पढ़ना
सुबह 7-7:30टीवी न्यूज देखना
सुबह 7:30-8नहाना और पूजा पाठ करना
सुबह 8-9नाश्ता, तैयार होना
सुबह 9- श्याम 6ऑफिस जाना
श्याम 6-7आराम करना, टीवी देखना
श्याम 7-9दोस्तो की पार्टी, कार्यक्रम या समारोह में जाना
रात 9-10टीवी देखना
रात 10- सुबह 6सोना
अपने अनुसार बनाए

इससे आपको यह पता चल जाएगा कि आपका समय किन गतिविधियों या कामों में लग रहा है। मोबाइल फोन पर आपने कितनी देर बातचीत की, उसके लिए रात को अपने मोबाइल का कॉल रजिस्टर देखकर अवधि दर्ज कर लें। इंटरनेट पर आपने कितना समय दिया, यह भी कंप्यूयटर की घड़ी देखकर दर्ज कर लें।

एक सप्ताह बाद रविवार को बैठकर इस पूरे रिकॉर्ड का अच्छी तरह विश्लेषण करें, ताकि आपको पता चल जाए कि आप अपना कितना समय इंटरनेट, मोबाइल फ़ोन, टी.वी. या सामाजिक मेल-मिलाप में खर्च कर रहे हैं । लॉग बुक को वह महत्वपूर्ण बुनियाद समझे, जिसकी नींव पर समय प्रबंधन का महल खड़ा है।

इसलिए खुद को अनुशासित करें और समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के दूसरे सिद्धांत पर पहुँचने से पहले लॉग बुक रखें यह कभी न भूलें कि समय प्रबंधन की पहली आवश्यकता यह जानना है कि आपका समय कहाँ और कितना खर्च हो रहा है । लाँग बुक का विश्लेषण इस दृष्टि से करें कि आपके द्वारा किए गए कौन से काम महत्वपूर्ण हैं और कौन से महत्वहीन, कहाँ से समय निकाला जा सकता है और किन कामों को पूरी तरह या आंशिक रूप से छोड़ा जा सकता है।

आपके विश्लेषण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन सी गतिविधियाँ निर्थक हैं या किन गतिविधियों में आप ज़रूरत से ज्यादा समय दे रहे हैं, जिन्हें छोड़कर या जिनमें कटौती करके आप अपना समय खाली कर सकते हैं।

2.अर्थिक लक्ष्य बनाएँ-

अगर आपका कोई लक्ष्य ही नहीं है, तो आपकी सफलता संदिग्ध है। अगर आप यही नहीं जानते कि आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं, तो आप कहीं नहीं पहुँच सकते। जैसे, किसी यात्रा पर जाने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आप कहाँ जाना चाहते हैं, उसी तरह आपको यह भी पता होना चाहिए कि आर्थिक क्षेत्र में आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं। तभी आप वहाँ तक पहुँच सकते हैं।

यदि आपकी कोई मंज़िल ही नहीं है, तो आप वहाँ तक पहुँचने की योजना कैसे बनाएँगे और उस दिशा में कैसे चलेंगे ? अगर आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं, तो यह जान लें कि लक्ष्य के बिना काम नहीं चलेगा। लक्ष्य जितना स्पष्ट होता है, आपके सफल होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है । आर्थिक लक्ष्य बनाना बहुत ही आसान है।

आपको पहले तो यथार्थवादी ढंग से यह तय करना है कि आप हर महीने कितनी धनराशि कमाना चाहते हैं और फिर गणित की सहायता से यह पता लगाना है कि इस धनराशि को कैसे कमाया जाए। स्पष्ट लक्ष्य होने पर आपको हर पल पता रहता है कि आपने कितनी प्रगति की है और यह संतोषजनक है या नहीं । आर्थिक लक्ष्य बनाना और उनके संदर्भ में अपनी प्रगति की जाच करते रहना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि हम अक्सर इस बारे में मुगालते में रहते हैं। हमें लगता है कि हम बहुत मेहनत कर रहे हैं, हमें लगता है कि हम जितना कर रहे हैं, उससे ज्यादा नहीं कर सकते।

लेकिन याद रखें, मेहनत का मतलब हमेशा सफलता नहीं होता। सफलता पाने के लिए यह ज़लूरी है कि मेहनत सही दिशा में की जाए। आर्थिक विश्लेषण से हमें यह पता चल जाता है कि हम सही दिशा में मेहनत कर रहे हैं या नहीं। देखिए, महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि आपका इनपुट क्या है, महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आपका आउटपुट क्या है; यानी महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि आप कितनी मेहनत कर रहे हैं, बल्कि यह है कि आप कितने सफल हो रहे हैं।

3.सबसे महत्वपूर्ण काम सबसे पहले करे-

अक्सर हमारी दिनचर्या इस तरह की होती है कि हमारे सामने जो काम आता है, हम उसे करने लग जाते हैं और इस वजह से हमारा सारा समय छोटे-छोटे कामों को निबटाने में ही चला जाता है। हमारे महत्वपूर्ण काम सिर्फ इसलिए नहीं हो पाते, क्योंकि हम महत्वहीन कामों में उलझे रहते हैं। महत्चाकांक्षी व्यक्ति को इस बारे में सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि सफलता पाने के लिए यह आवश्यक है कि महत्तपूर्ण काम पहले किए जाएँ।

हमेशा याद रखें कि सफलता महत्वहीन नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण कामों से मिलती है, इसलिए अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट रखें और अपना समय महत्वहीन कामों में न गँवाएँ। व्यक्ति को अपने सबसे महत्वपूर्ण काम सबसे पहले करने चाहिए, लेकिन इसके लिए उसे यह पता लगाना होगा कि सबसे महत्वपूर्ण काम हैं कौन से। उसके पास उसकी प्राथमिकताओं की स्पष्ट योजना होना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही आसान है।

एक डायरी में ए, बी और सी शीर्षक के तीन कॉलम बना लें। ए कॉलम में अपने सबसे महत्वपूर्ण काम रखें, जिन्हें आप अनिवार्य मानते हैं। बी कॉलम में ऐसे काम रखें जो अनिवार्य तो नहीं हैं, परंतु महत्वपूर्ण हैं। सी कॉलम में ऐसे सामान्य काम रखें, जो न तो अनिवार्य हैं, न ही महत्वपूर्ण।

दिन में सबसे पहले ए कॉलम के पहले काम यानी ए। काम से शुरू करें, जो सबसे अनिवार्य काम होगा। उसे पूरा करने के बाद आप इसी कॉलम के दूसरे काम करने में जुट जाएँ और इस तरह ए कॉलम के सारे काम निबटा लें। ए कॉलम के बाद बी कॉलम के काम शुरू करें और इसके बाद समय बचने पर ही सी कॉलम के कामों की ओर जाएँ।

4.यात्रा के समय का अधिकतम उपयोग करें-

हर सफल व्यक्ति अपने 24 घंटों में ज्यादा से ज्यादा उपयोगी काम करना चाहता है। उसकी पूरी दिनचर्या ही समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग पर केंद्रित होती है। माइक मरडॉक ने कहा भी है, ‘आपके भविष्य का रहस्य आपकी दिनचर्या में छिपा हुआ है।’ यात्रा आपकी दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज हर व्यक्ति बहुत सी यात्राएँ करता है, जिनमें उसका बहुत समय लगता है।

फ़र्क सिर्फ इतना होता है कि जहाँ आम व्यक्ति यात्रा के समय में हाथ पर हाथ धरकर बैठता है, वहीं सफल व्यक्ति अपने बहुमूल्य समय का अधिकतम उपयोग करता है। महात्मा गाँधी यात्रा करते समय नींद लेते थे, ताकि वे तरोताजा हो सके। नेपोलियन जब सेना के साथ युद्ध करने जाते थे, तो रास्ते में पत्र लिखकर अपने समय का सदुपयोग करते थे। एडिसन अपने समय की बर्बादी को लेकर इतने सचेत थे कि किशोरावस्था में जब वे रेल में यात्रा करते थे, तो अपने प्रयोगों में जुटे रहते थे।

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स यात्रा के दौरान मोबाइल पर ज़रूरी बातें करके इस सिद्धांत पर अमल करते हैं। बिल गेट्स ने तो एक बार अपने गैरेज में अफ्रीका का नक्शा टाँग दिया था, ताकि जब वे अपनी कार का इग्निशन बंद करें, तो उनके क्रीमती सेकंड बर्बाद न हों, बल्कि उनका कुछ उपयोग हो जाए। समय को लेकर सभी सफल लोग सतर्क रहते हैं, क्योकि वे जानते हैं कि समय बड़ा बलवान होता है। और इसके सदुपयोग से ही सफलता संभव है।

5.काम सौंपना (डेलीगेशान) सीखे-

कोई भी इंसान सब कुछ नहीं कर सकता। बरहाल कई लोग हर काम खुद करने की कोशिश करते हैं। और जाहिर है, वे असफल होते हैं। हर व्यक्ति यह चाहता है कि अपने महत्वपूर्ण काम वह खुद करे, लेकिन एक निश्चत ऊँचाई पर पहुँचने के बाद प्रगति करने के लिए दूसरों को काम सौंपना अनिवार्य हो जाता है।

बिज़नेस की शुरुआत में तो व्यक्ति सारे काम खुद कर सकता है, परंतु बिज़नेस बढ़ने के बाद काम इतने बढ़ जाते हैं कि सहयोगियों के बिना तरक्की नहीं हो सकती। ऐसे में अगर वह सही सहयोगी खोजकर उन्हें काम सौंपना (डेलीगेशन) सीख ले, तो वह आगे भी प्रगति कर सकता है। अगर वह यह नहीं सीख पाता, तो भविष्य में उसकी प्रगति की संभावना धूमिल हो जाती है।

6.पैरेटो के 20/80 के नियम को जाने-

पैरेटो का 20/80 का नियम समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे जानने के बाद हम समय का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। पैरेटो के अनुसार ‘आपकी 20 प्रतिशत प्राथमिकताएँ आपको 80 प्रतिशत परिणाम देंगी, बशर्ते आप अपनी शीर्षस्थ 20 प्रतिशत प्राथमिकताओं पर अपना समय, ऊर्जा, धन और कर्मचारी लगाएँ।’

यानी हमें अपने 80 प्रतिशत परिणाम 20 प्रतिशत समय से मिलते हैं। इसका यह अर्थ भी है कि हमारे समय का अधिकांश हिस्सा यानी 80 प्रतिशत, सिर्फ 20 प्रतिशत परिणाम हासिल करने में बर्बाद होता है।

यदि हम अपने समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करना चाहते हैं, तो यह आवश्यक है कि हम उस 20 प्रतिशत सार्थक समय का पता लगाएँ और जहाँ तक संभव हो, उसे बर्बाद होने से बचाएँ। यही नहीं, हमें उस 80 प्रतिशत समय का भी पता लगाना चाहिए, जिसमें हम सिर्फ 20 प्रतिशत परिणाम ही हासिल कर पाते हैं। ऐसा करने पर हम अपने सार्थक समय के अनुपात को बढ़ा सकते हैं और निर्थक समय को कम कर सकते हैं।

7.पार्किन्सन के नियम का लाभलें-

समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए पार्किन्सन के नियम को जानना बहुत आवश्यक है। पार्किन्सन का नियम है, ‘काम उतना ही फैल जाता है, जितना इसके लिए समय होता है।’ इसका अर्थ यह है कि हमारे पास जितना काम होता है, हमारा समय भी उसी के अनुरूप फैलता या सिकुड़ता है। यानी अगर हम कम समय में ज्यादा काम करने की योजना बनाएँगे, तो समय फैल जाएगा और वे सारे काम उसी अवधि में पूरे हो जाएँगे। दूसरी ओर, अगर हम उतने ही समय में कम काम करने की योजना बनाएँगे, तो समय सिकुड जाएगा और उतनी ही अवधि में हम कम काम कर पाएँगे।

लक्ष्य जितना बड़ा होगा, उपलब्धि भी उतनी ही बड़ी होगी काम की प्रकृति से भी समय के फैलने या सिकुड़ने का संबंध होता है। जब किसी काम में हमारी रुचि होती है, तो वह काम जल्दी हो जाता है। दूसरी ओर, जब किसी काम में हमारी रुचि नहीं होती, तो वह देर से होता है। इसीलिए यह कहा जाता है कि वह व्यक्ति सौभाग्यशाली है, जो अपने काम से प्रेम करता है, क्योंकि वह कम समय में ज्यादा काम कर सकता है, ज्यादा अच्छी तरह से काम कर सकता है और इस वजह से ज्यादा सफल भी हो सकता है।

8.अपने प्राइम टाइम में काम करे-

टेलीविज़न पर प्राइम टाइम में – यानी रात आठ बजे से दस बजे तक – विज्ञापन की कीमत सबसे ज्यादा होती है। विज्ञापन उतने ही समय का रहता है, परंतु इसकी क़रीमत बढ़ जाती है। क़रीमत बढ़ने का कारण सिर्फ यह होता है कि वह विज्ञापन प्राइम टाइम में प्रसारित किया जाता है, जिसमें इसे ज्यादा दर्शकों द्वा देखा जाता है। टेलीविज़न के प्राइम टाइम की अवधारणा से हम यह सीख सकते हैं कि हमारे-आपके लिए भी दिन के चौबीसों घंटे एक से नहीं होते। दिन के किसी खास समय आपकी ऊर्जा, विचार-शक्ति, उत्साह और कार्यक्षमता बाक़ी समय की तुलना में अधिक होती है।

यही आपका प्राइम टाइम है। ज्यादातर लोगों के लिए सुबह का समय प्राइम टाइम होता है, जब वे बड़े-बडे काम चुटकियों में कर सकते हैं। परंतु ध्यान रहे, हर व्यक्ति का प्राइम टाइम अलग-अलग होता है। कई लोगों के लिए रात का समय प्राइम टाइम हो सकता है और कइयों के लिए दोपहर का। आपका प्राइम टाइम चाहे सुबह का हो या रात का, महत्वपूर्ण बात इसे पहचानना है।

9.स्वयं को व्यवस्थित करे-

अव्यवस्थित जीवन हमारे सामने कई मुश्किलें खड़ी कर 3 देता है। इनमें से एक मुश्किल यह है कि हमारा समय न चाहते हुए भी अनावश्यक रूप से बर्बाद होता है और दुखद बात यह है कि हम खुद ही इसके लिए दोषी होते हैं। यह ध्यान रखें कि अगर आपकी दिनचर्या व्यवस्थित है, तो आपका जीवन भी व्यवस्थित होगा और जब आपका जीवन व्यवस्थित होगा, तो आप सहजता से समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर पाएँगे।

10.टाइमटेबल बनाएँ-

जिस तरह पैसे की बर्बादी को रोकने के लिए बजट बनाना ज़रूरी है, उसी तरह समय की बर्बादी को रोकने के लिए टाइमटेबल बनाना ज़रूरी है। आपका टाइमटेबल दो तरह का हो सकता है : पूर्ण टाइमटेबल और संक्षिप्त टाइमटेबल।

पूर्ण टाइमटेबवल-

पूर्ण टाइमटेवल में आप पूरे 24 घंटे की योजना बनाते हैं, जबकि संक्षिप्त टाइमटेबल में आप सिर्फ सीमित समय की ही योजना बनाते हैं।

आइए, पूर्ण टाइमटेबल का उदाहरण देखें :

8 घंटेनींद और स्नान
2 घंटेनाश्ता, लंच, डिनर, चाय-कॉफ़ी इत्यादि
2 घंटे टी. वी सीरियल, टी.वी न्यूज, अखबार, पत्रिकाएं, पुस्तकें
1 घंटे आफिस आना-जाना, यात्रा में लगने वाला समय
1 घंटे सामाजिक जीवन
2 घंटे पारिवारिक जीवन
8 घंटे कामकाज, नौकरी या बिजनेस
अपने अनुसार बनाए

संक्षिप्त टाइमटेबल-

संक्षिप्त टाइमटेबल में आप पूरे दिन की योजना नहीं बनाते, सिर्र अपने कामकाज या बिज़नेस के घंटों की योजना बनाते हैं। मान लें, आप हर दिन 8 घंटे काम करना चाहते हैं। इस स्थिति में आप खुद से कहते हैं, ‘मैं सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक काम कलँगा।’ आपके टाइमटेबल में बाकी कामों की कोई योजना नहीं होती। इसमें सिर्फ आपके काम के समय की योजना होती है। यदि किसी दिन या किसी सप्ताह आपके पास ज़रूरत से ज्यादा काम होता है, तो उसे पूरा करने के लिए आप अपने टाइमटेबल में एक-दो घंटे का समय बढ़ा लेते हैं।

ऐसी स्थिति में आप खुद से कहते हैं, ‘मैं सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम को 7 या 8 बजे तक काम कलँगा।’

महत्वपूर्ण- दोस्तो ये 10 सिद्धांत टाइम मैनेजमेंट किताब से साभार है जो डॉ. सुधीर दीक्षित द्वारा लिखी गई है। इस किताब में टाइम मैनेजमेंट के 30 सिद्धांत बताए गए है यदि आप टाइम मैनेजमेंट के बारे में ओर जानना चाहते है तो बुक पर क्लिक करे-

2 thoughts on “टाइम मैनेजमेंट के 10 अहम सिद्धांत ; ऐसे करे समय का उपयोग – Time Management In Hindi”

  1. This article is really awesome. It gives knowledge to manage our time. Please read this if you want to manage your daily life. After reading this story you would mange your time.

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