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तेनाली रामा की चतुराई भरी कहानियां। Tenali Raman Stories In Hindi

Tenali Raman Stories In Hindi- तेनाली रामा को एक विकट कवि के रूप में पहचाना जाता है। जो अपनी हास्य कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। उनके बचपन का नाम रामकृष्ण था तो कोई उन्हे रामलिंग भी कहता था। लेकिन अपने जीवन का अधिकतर समय ननिहाल तेनाली में बिताने के कारण उनका नाम तेनाली रामा पड़ा।

तेनाली रामा राजा कृष्ण देव राय के शासन के तहत एक शाही कवि थे। जो विजयनगर के आठ श्रेष्ठ कवियों में से एक थे। तेनाली को भी बीरबल जैसी बुद्धि का घोतक माना जाता है। दोनों किसी भी समस्या का निवारण हस्ते-हस्ते करने में सक्षम थे।

तेनाली रामा की चतुराई भरी कहानियां- Tenali Raman Stories In Hindi

राजा की अंगूठी

एक दिन राजा कृष्ण देव राय गहन चिंतन में थे। उनकी हीरे की अंगूठी कहीं गिर गई थी। राजा को अपने द्वारपालों पर शक था। क्योंकि उनके अलावा वहां दूसरा कोई नहीं था। जब राजा ने द्वारपालों से पूछा तो वे सब मना करने लगे।

उन्होंने इस समस्या का हल निकालने के लिए तेनाली रामा को बुलाया और आपबीती सुनाई। तेनाली ने राजा की बात सुनकर सभी द्वारपालों को एकत्रित किया।

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तेनाली ने एक कक्ष की ओर इशारा कर द्वारपालों से कहां- आप सब को बारी-बारी इस कक्ष में जाना है, जहां काली माता की मूर्ति रखी है। आप सभी को माता का दायना पैर छूकर आना है। जिसने भी अंगूठी चुराई होगी माता मुझे सपने में आकर उसका नाम बता देंगी।

सभी द्वारपाल बारी-बारी माता का पैर छूकर आ गए। तेनाली ने शुरुआती छ: द्वारपालो के हाथ सुंगे तथा उन्हें जाने दिया। सातवें का हाथ सुंगते ही तेनाली ने कहां महाराज ये है चोर। यह सुनते ही द्वारपाल के हौश उड़ गए। वह राजा से माफी मांगने लगा। लेकिन राजा ने दया न दिखाते हुए उसे जेल में डलवा दिया।

राजा- तेनाली तुमने तो कहां था माता तुम्हारे सपने में आकर बताएंगी, लेकिन तुमने तो अभी बता दिया। ये तुमने कैसे किया?

तेनाली- महाराज ये तो मैंने चोर को भयभीत करने के लिए कहां था, ताकि वह कोई गलती करें। ओर उसने गलती कर दी, मैंने सभी को माता का दायना पैर छूने के लिए कहां था। जिस पर मैंने सुगंधित पदार्थ लगा रखा था। सभी द्वारपालों ने वहीं पैर छुआ लेकिन चोर ने माता का बायां पैर छुआ जिससे उसके हाथ में कोई सुगंध नही आई और आसानी से पकड़ा गया।

शिक्षा:- इंसान अपनी बुराईया कितनी भी छुपा ले एक दिन सत्य का पता लग ही जाता है।

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दिखावट से तोलना

एक बार राजा कृष्ण देव राय के पड़ोसी राज्य के राजा के घर में एक पुत्र ने जन्म लिया। उस राजा ने महाराज कृष्ण देव राय को अपने मंत्री गण के साथ आकर उसके पुत्र को आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया।

राजा कृष्ण देव राय अपने मंत्री और तेनाली के साथ वहां पहुंच गए। बच्चे को देखते ही तेनाली ने कहां यह बच्चा अपने पिता से भी अधिक बुद्धिमान और एक बड़ा योद्धा बनेगा।

बच्चे का पिता अत्यंत खुश हुआ। लेकिन सभी मंत्री गण तेनाली का यह कहकर मजाक उड़ाने लगे की केवल दिखावट से आप किसी चीज को कैसे तोल सकते हो। राजा कृष्ण देव राय ने भी इस बात पर मंत्री गण का समर्थन किया।

तेनाली- महाराज मैं किसी भी वस्तु को दिखावट से तोल सकता हूं।

तेनाली की बात सुनकर मंत्री गण और राजा ने मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने दो मटके लिए एक में सोने के सिक्के भर दिए तथा दूसरा खाली छोड़ दिया और उन्हें एक पेड़ पर बांध दिया।

उसके बाद उन्होंने तेनाली रामा को बुलाया और बोले, “आप दिखावट से किसी भी वस्तु को तोल सकते है तो बताइए इन दोनो मटकों में सोने के सिक्को से भरा मटका कौन-सा है”?

तेनाली ने बड़ी ही आसानी से इसका सही उत्तर दे दिया।

राजा- तेनाली तुमने इसका जवाब इतनी जल्दी कैसे दे दिया?

पागल की सलाह

तेनाली- महाराज यह पहेली इतनी आसान है की इसका जवाब कोई भी दे सकता है। आपने दो मटके लटकाए है जिसमें एक खाली है तथा दूसरा भरा है।
आप अगर ध्यान इनकी रस्सी पर देखेंगे तो पाएंगे की भरे हुए मटके की रस्सी खिंचाव में है, तथा खाली मटके की रस्सी ढीली-ढाली है और हवा चलने के कारण मटका निरंतर हिल रहा है।

तेनाली रामा के इस कथन से राजा और मंत्री गण यह समझ गए की वाकई दिखावट से वस्तु को तोल जा सकता है।

शिक्षा:- किसी भी इंसान का व्यावहार उसके संस्कारो को समझने की एक सीड़ी है।

परदेशी का सवाल

एक बार राजा कृष्ण देव राय की सभा में एक परदेशी आया और राजा एवम् सभा में मौजूद सभी से एक सवाल पूछने की आज्ञा मांगी और साथ ही जवाब देने वाले को उपहार में एक हीरो का हार देने को कहां।

राजा- पूछिए क्या सवाल है?

परदेशी- आपके राज्य में सबसे मूल्यवान चीज क्या है?

एक ने जवाब दिया “राज्य का खजाना”।

दूसरे ने जवाब दिया “हीरो से जड़ा राजा का मुकुट”।

तो कोई कहता है “सेना”।

राजा (तेनाली राम की तरफ देख कर):- तेनाली आपका जवाब क्या है?

तेनाली- महाराज किसी भी राज्य की सबसे मूल्यवान चीज है लोगों की आजादी।

परदेशी- आजादी वो कैसे? आप इसे कैसे सिद्ध करेंगे?

तेनाली- मुझे थोड़ा समय दीजिए मैं इसे सिद्ध कर दूंगा।

महाराज- तो ठीक है जब तक तेनाली रामा इसे सिद्ध नहीं करते परदेशी यहां के महमान है। राजा ने परदेशी के रहने, खाने-पीने की सुविधा की देख-रेख तेनाली रामा को सौंप दिया।

परदेशी को महल में सारी सुविधाएं दी गई शाही-भोजन, नित्य और संगीत आदि सुविधाओं से परदेशी महल में काफी खुश था। एक दिन उसका मन नदी किनारे टहलने का हुआ। जब वह अपने कक्ष से बाहर निकलता है, तो द्वारपाल उसका रास्ता रोक लेते है और कहते है, “क्षमा करे महाशय आपको बाहर जाने की अनुमति नहीं है”।

परदेशी को लगा यह सब मेरी सुरक्षा के लिए है और वापस अपने कक्ष में चला जाता है। लेकिन यह रोक-थाम परदेशी के साथ प्रति-दिन होने लगी किंतु महल के अंदर सुविधाओं में उसे कोई कमी नहीं आने दी। वह महल के अंदर कैद हो गया था। जिस कारण सभी सुविधाएं उसे फीकी लगने लगी।

दस दिन के बाद सभा फिर लगी तेनाली ने महाराज से परदेशी को सभा में बुलाने की आज्ञा मांगी। परदेशी सभा में पहुंचता है।

राजा(परदेशी से)- क्या आपको महल की सुख सुविधाएं अच्छी लगी?

परदेशी- महाराज सुविधाएं तो भरपूर थी किंतु मैं निरंतर उनका लुप्त न उठा सका। मुझे बाहर घूमने-फिरने की सुविधा नहीं दी गई मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानों किसी ने मेरी आजादी मुझ से छीन ली हो।

दो वरदान

चुकी महाराज ने परदेशी की देख-भाल का जिम्मा तेनाली रामा को दिया था, तो वे तेनाली पर बहुत गुस्सा हुए।

तेनाली- महाराज क्षमा करें किन्तु मैं परदेशी को बताना चाहता था, की आजादी से मूल्यवान कुछ भी नहीं। इनके पास सारे असो-आराम होते हुए भी ये उनका निरंतर लुप्त न उठा सके क्योंकि इनके पास इनकी आजादी नहीं थी।

परदेशी को अपने सवाल का जवाब मिल चुका था। उसने खुश होकर तेनाली रामा को हीरो का हार उपहार में दिया। राजा कृष्ण देव राय और सभा में मौजूद सभी तेनाली की चतुराई पर तालिया बजाने लगे।

शिक्षा:- आजादी एक ऐसा मूल्यवान शब्द है जो हमारी अंधेरी दुनिया में एक प्रकाश का उजाला लेकर आता है।

लालची बर्तन वाला

एक समय की बात है गांव के लोग, गांव में बड़ रहे धनी लोगों के लालच से परेशान होकर तेनाली रामा के पास आने लगे। तेनाली भी रोज-रोज की शिकायते सुन परेशान होने लगा। उसने लालची लोगों को सुधारने की रणनीति बनाई।

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वह एक लालची बर्तन वाले के पास गया।

तेनाली- सेठ जी मुझे घर पर दावत करनी है आप मुझे तीन बड़े बर्तन किराए पर दे दो।

लालची ने उससे जरूरत से ज्यादा पैसे मांगे। तेनाली समझ गया लोगो की बात ठीक है। वह बर्तनों को घर ले आया और वैसे ही दिखने वाले छोटे आकार के बर्तन खरीदे और वापस लालची बर्तन वाले के पास पहुंच गया।

तेनाली- सेठ जी मुझे लगता है आपके बर्तन पेट से थे, इन्होंने तीन छोटे बर्तनों को जन्म दिया है।

लालची तेनाली की बात समझ नहीं पाया किंतु यह समझ गया की यह कोई पागल आदमी है। तेनाली के जाने के बाद वह काफी प्रसन्न हुआ। उसको तीन बर्तन की जगह छ: बर्तन मिल गए थे।

कुछ दिनों बाद तेनाली वापस उसकी दुकान पर जाता है और लालची को पैसे देकर पांच बर्तन किराए पर लेता है। लालची ने सोचा क्यों न इसे दुबारा बेवकूफ बनाया जाए।

लालची (तेनाली से):- सुनों भाई मेरे ये बर्तन भी पेट से है, दो-तीन दिन बाद इनके बच्चे होने वाले है तो इनका ख्याल रखना और वापस आकर मुझे दस बर्तन दे देना।

यह सुनकर तेनाली वहां से चला जाता है।

कई दिन बीत जाने पर जब तेनाली उसकी दुकान पर नहीं लोटा तो लालची उसके घर पहुंच जाता है।

लालची- भाई आप ने मेरे बर्तन वापस क्यों नहीं दिए? अब तक तो उनके बच्चे भी हो गए होंगे। चलो लाओ मेरे दस बर्तन मुझे दे दो।

तेनाली(दुखी होकर)- मुझे खेद से कहना पड़ रहा है की बच्चे देते वक्त आपके बर्तनों की मृत्यु हो गई।

लालची(गुस्से में)- क्या तुम मुझे बेवकूफ समझते हो? भला बर्तन भी मरते है।

तेनाली- क्यों जब बच्चे दे सकते है तो बच्चे देते वक्त मर भी तो सकते है।

लालची अब समझ चुका था की यह कोई बेवकूफ नहीं बल्कि ज्ञानी परूष है।

शिक्षा:- कंजूसी एकमात्र ऐसा रास्ता है जो हमारे जीवन को बर्बादी की ओर ले जाता है।

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तेनाली की मोटी बिल्ली

एक बार की बात है, राजा कृष्ण देव राय की पत्नी यानी रानी को बिल्लियां पालने का शौक चढ़ गया। बिल्लियों के प्रति रानी की दिवानगी इतनी अधिक हो गई की उन्होंने अपने सभी सभा मंत्री, द्वारपाल और तेनाली रामा को एक-एक बिल्ली और एक-एक गाय पालने के लिए दे दी।

गाय इसलिए दी गई ताकि बिल्लियों को गाय का ताजा दूध मिल सके। सभी लोग अपनी-अपनी गाय और बिल्ली लेकर घर चल दिए।

ठीक एक महीने बाद रानी ने सभी को अपनी बिल्लियों के साथ महल आने का आदेश दिया ताकि वह देख सके की किसने बिल्ली की सबसे अच्छी देख भाल की है।

रानी ने देखा तेनाली रामा की बिल्ली सबसे मोटी और हस्ट-पुष्ट दिख रही है। रानी ने खुश होकर तेनाली को 100 सोने की मुद्राएं उपहार में दे दी।

जब तेनाली अपने घर पहुंचा तो अपनी पत्नी को सारी बात बताई।

तेनाली की बात सुनकर उसकी पत्नी बोली- हमारी बिल्ली तो रानी की दी हुई गाय का दूध भी नहीं पीती तो यह मोटी कैसे हुई?

तेनाली- एक दिन मैंने बिल्ली को उबला हुआ दूध पिला दिया था। जिससे उसका मुंह जल गया जब से उसने दूध पीना छोड़ दिया और घर के चूहे पकड़ कर खाने लगी और गाय का दूध हमारे बच्चो को मिला जिससे हमारे घर के चूहे भी खत्म हो गए। बिल्ली भी मोटी हो गई और बच्चे भी हस्ट-पुष्ट हो गए।

तेनाली रामा की चतुराई भरी कहानियां आपको कैसी लगी कृपा कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताए ।

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