Home कहानीयां संत की परीक्षा । हिंदी कहानी । Sant Ki Priksha Best Hindi Story
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संत की परीक्षा । हिंदी कहानी । Sant Ki Priksha Best Hindi Story

by Sneha Shukla

Sant Ki Priksha Best Hindi Story- जब कोई गुरु महाराज अपने शिष्य को शिक्षा प्रदान करता है तो उसके मन में एक भय हमेशा रहता है की उसका शिष्य उस शिक्षा का सदुपयोग करेगा या दुरुपयोग।

इस कहानी में आप पढ़ेंगे की गुरु महाराज जब अपने शिष्यों को शिक्षा में परिपूर्ण कर देते है तब बारी-बारी कैसे सभी शिष्यों की परीक्षा लेते है और अंत में क्या परिणाम निकलता है।

Sant Ki Priksha Best Hindi Story
संत की परीक्षा

एक बार एक प्रतापी संत व्यास जी, अपने शिष्यों को आश्रम में पढ़ा रहे थे। उनके बहुत से शिष्य थे, व्यास जी रोज अपने शिष्योंं को नई-नई बाते सिखाते और ज्ञान ध्यान की बात भी समझाते।

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और सभी शिष्य अपनी विद्या में पूर्ण हो गए तो संत ने कहा अब आप कहीं भी जाकर अपनी आगे की साधना कर सकते हो, और लोगों में अपने ज्ञान का प्रचार कर सकते हो।

धीरे-धीरे सभी शिष्य गुरु जी से आज्ञा लेकर अपने-अपने रास्ते चल दिए। काफी वक्त बीत जाने के बाद संत ने सोचा की चेलों को गए काफी समय हो गया है तो क्यों न चल कर उनकी परीक्षा ली जाए, कहीं वे अपनी शिक्षा का दुरुपयोग तो नहीं कर रहे।

इस प्रकार संत जी अपने आश्रम से चेलों को डूंडने निकल जाते है और बारी-बारी सभी से मिलते है। मिलने पर संत जी ने पाया सभी सही दिशा में काम कर रहे थे।

लेकिन एक शिष्य अभी बाकी था उसके बारे में संत जी को मालूम हुआ कि उसने ग्रहत्याग कर दिया और जंगल में एक सन्यास आश्रम खोल लिया, वहा बड़ा ही कठोर जप, तप कर रहा है। संत जी यह बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उससे मिलने जंगल की ओर चल दिए।

जंगल में श्याम के समय एक बहुत ही खूबसूरत औरत पायल की छम-छम की आवाज करती हुई आश्रम में आती है और देखती है की बाबा जी आंख मुंद कर भक्ति में लीन है।

संत की परीक्षा। Sant Ki Priksha Best Hindi Story.
संत की परीक्षा

वह खूबसूरत औरत बाबा के थोड़ा पास जाती है और अपनी चूड़ी व पायल खनकाती है। छम-छम की आवाज से जब बाबा ने आंख खोली तो देखा सामने एक बहुत सुंदर स्त्री खड़ी है।

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स्त्री:- हाथ जोड़कर हे महाराज मैं बड़ी परेशानी में हु, मै अपने संग की सहेलियों के साथ मेला देखने आई थी, रास्ते में इतनी भयंकर आंधी और बरसात आई की हम सब आपस में बिछड़ गई न जाने कौन किधर चली गई और मैं भटकती हुई इस बियाबान जंगल में आ गई अब तो अंधेरा भी होने लगा है, तो कृपा मुझे आज की रात आपकी कुटिया में बिताने दे तो आपकी बड़ी कृपा होगी।

बाबा जी:- अरे बावली न यहाँ स्कूल न ही इस बियाबान में धर्मशाला यहां तो बस मेरी एक कुटिया ही है, इसमें केवल संत फकीरों का आसन लगता है, जिसमें हम भजन करते है और माला फेरते है अपने शरीर की साधना करते है, यहां औरतो का काम नहीं तू कहीं ओर जाकर अपना ठिकाना देख।

स्त्री:- महाराज अब तो धीरे-धीरे रात भी हो गई मैं अकेली अबला नारी कहा जाऊंगी मुझे रात-रात रुकने दो सुबह होते ही मैं अपने रास्ते चली जाऊंगी।

बाबा:- कुछ सोचते हुए – चलों एक काम करो मेरी आसन माला बाहर लाकर रख दो और तुम कुटिया में जा कर सो जाओ और सुबह तक बाहर मत निकलना अंदर से कुंडी लगा लेना, हां मैं बार-बार कह रहा हुं रात को बाहर मत निकलना क्योंकि मेरी भक्ति में बाधा उत्पन्न होती है।

स्त्री:- ठीक है महाराज।

स्त्री दरवाजा अंदर से कुंडी लगा कर सो जाती है, इधर बाबा जी अपने ध्यान में भजन करने लगते है, आधी रात तक तो भजन करते है फिर अचानक बाबा जी को स्त्री का ख्याल आने लगता है।

बाबा जी के मन में कपट आने लगा और उसके कदम कुटिया की ओर बड़ने लगे। वहा जा कर दरवाजा खटखटाने लगा लेकिन बहुत दरवाजा खटखटाने पर भी स्त्री ने दरवाजा नहीं खोला, तो बाबा को बड़ा गुस्सा आया और हथौड़े से दरवाजा तोड़ने लगा, काफी महनत के बाद दरवाजा टूट गया।

रात के समय कुटिया में बहुत अंधेरा था तो बाबा ने अलाव ( दिया ) ढूंढ कर जला दिया, अलाव की रोशनी में बाबा देखते है एक बहुत ही बड़ी-बड़ी दाढ़ी, मूंछ और बड़ी जटाओं वाला महाराज आंख मूंद कर माला फेर रहा है।

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कपटी बाबा महाराज को देख सन्न्न रह जाता है। ये जटाओं वाले महाराज कोई और नहीं बल्कि महात्मा व्यास औरत के रूप में चेले की परीक्षा लेने आए थे।

संत की परीक्षा कहानी आपको कैसी लगी कृपा कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताए ।

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4 comments

Gori Sharma September 27, 2021 - 4:32 PM

Sant Ki pariksha Is Very Nice Story Men.
Thanks To You For Publish this Story
“Great Job”

Reply
wartmaansoch September 28, 2021 - 2:15 PM

Thanks, Gori I am always ready to publish new stories for you.

Reply
Saloni Gupta September 27, 2021 - 5:26 PM

^_^
Very Useful Men

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wartmaansoch September 28, 2021 - 2:15 PM

Thanks

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