Raja Parikshit Or Naag Lok Hindi Story.

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-1 । Raja Parikshit Story In Hindi

दोस्तो हम आपको बता दे की नाग लोक के राजा बासिक के उपर हमारे पास कहानियों की पूरी सीरीज है जिसे हम समय – समय पर प्रकाशित करते रहेंगे। इस कहानी सीरीज मे आप नाग लोक के सभी शक्तिशाली नागो के बारे मे पढ़ेंगे जिसमें – नाग लोक के राजा वासुकी जिसे बासिक भी कहां जाता है, तक्षक नाग, भूरिया नाग जिसे दो मुंह की दुम भी कहां जाता है, करकोटक नाग आदि का विशेष विश्लेषण किया गया है और साथ ही आपको बताएंगे की नाग लोक के ये शक्तिशाली सांप क्यो थे पृथ्वी लोक के राजा परीक्षित के जान के प्यासे। आखिर क्या था इसका रहस्य। इस सीरीज के माध्यम से हम ये सभी रहस्य आपके सामने उजागार करेंगे।

Raja Parikshit Story In Hindi Part-1

एक समय की बात है नाग लोक के राजा बासिक का मन एक दिन शिकार पर जाने का हुआ। राजा ने अपना धनुष – बाण उठाया और घोड़े पर सवार होकर शिकार के लिए जंगल में पहुंच गए लेकिन इतेफाक से पृथ्वी लोक के राजा पारिक भी उसी जंगल में शिकार खेलने के लिए मौजूद थे। कुछ समय बाद राजा बासिक को शिकार के लिए एक हिरण उछल – कूद करता हुआ दिखाई देता है, राजा बासिक हिरण के पीछे अपना घोड़ा दौड़ा देते हैं। दूसरी तरफ पृथ्वी लोक के राजा पारिक का ध्यान भी उसी हिरण पर जाता है और वह भी अपना घोड़ा हिरण के पीछे लगा देते हैं यानी दोनों राजा एक ही हिरण का पीछा कर रहे थे।

अचानक हिरण तो झाड़ियों में छिप गया लेकिन दोनों राजा एक – दूसरे के सामने आ जाते हैं। एक – दूसरे को देख कर दोनों राजाओं की हंसी छूट जाती है क्योंकि दोनों ही राजा हिरण का शिकार करने में असमर्थ हो जाते हैं। दोनों राजा अपने घोड़े से नीचे उतरते हैं और एक दूसरे का अभिवादन कर कुछ विचार विमर्श करने लगते है।

राजा पारिक – राजन क्षमा करे लेकिन मैंने पहली बार आपको देखा है। कृपा आप अपना परिचय दे। आप कौन है और कहा से आये है ?

राजा बासिक – राजन मैं नाग लोक का राजा बासिक हूं और आज शिकार के उदेश्य से यहां आया हूं। कृपा आप भी अपने बारे में बताये?

राजा पारिक – मैं पृथ्वी लोक का राजा पारिक हूं और आपकी तरह मैं भी आज शिकार के उदेश्य से यहां आया हूं।

थोड़ी देर बाद दोनों राजा एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ जाते है और बातों ही बातों में एक दूसरे के अच्छे मित्र बन जाते हैं। अपनी वार्ता को आगे बढ़ाते हुए राजा बासिक कहते हैं – मित्र मेरे हृदय में एक विचार आया है यदि आप आज्ञा दे तो मैं आपको बताऊं।

राजा पारिक – मित्र आपका जो भी विचार है, मुझे खुलकर बताइए आज मैं आपसे मिलकर बहुत प्रश्न हूं इसलिए मैं आपके विचारों का तहदिल से स्वागत करता हूं।

राजा बासिक – मित्र मेरा विचार है कि आज हम दोनों एक दूसरे से मिल कर इतने प्रसन्न है तो क्यों ना इस दिन को एक यादगार दिन बना दिया जाए।

राजा पारिक – वो कैसे मित्र बासिक ?

राजा बासिक – देखो आज हम नए – नए मित्र बने हैं, तो मित्र होने के नाते हम कभी – कभी ही मिल पाएंगे किंतु यदि हम कुछ ऐसा कर दें जिससे हम दोनों में कोई रिश्ता बन जाए तो हम जब चाहे तब ही एक – दुसरे से मिल सकते हैं।

राजा पारिक – आपका विचार तो उत्तम है मित्र लेकिन ये बताइए यह होगा कैसे ?

राजा बासिक – देखिए मित्र मेरी बात ध्यान से सुनिए अभी आपकी भी नई – नई शादी हुई है और मेरी भी यदि आप की रानी एक लड़के को जन्म देती है और हमारी रानी लड़की को तो हम दोनों उनका रिश्ता पक्का कर देंगे और यदि आप की रानी एक लड़की को जन्म देती है और हमारी रानी एक लड़के को तो भी रिश्ता पक्का और यदि हम दोनों के लड़के या लड़कियां जन्म लेती है तो हम मित्र तो है ही फिर धर्म भाई भी बन जाएंगे।

राजा पारिक भी राजा बासिक की मित्रता मे इतने डुब चुके थे कि यह विचार राजा पारिक को बहुत पसंद आया फिर दोनों खड़े हुए और गले मिलते हुए एक दूसरे से बोले, आज जो भी हमारी वार्ता हुई है उसे भूल ना जाना वादा याद रखना। फिर दोनो अपने – अपने घोड़े पर सवार होकर अपनी नगरी की ओर चल दिए।

दोस्तों जैसा की आप जानते है समय किसी का इंतजार नहीं करता, समय धीरे-धीरे अपनी दिशा की ओर बढ़ता जा रहा था इधर दोनों ही राजाओं की रानियों को गर्भ ठहर गया था धीरे – धीरे नौ महीने बाद वह दिन भी आया जब राजा पारिक के यहां लड़के ने जन्म लिया। राजा पारिक के महल और दरबार में ढोल – नगाड़ों से खूब खुशियां मनाई जा रही थी। गरीबों को दान दिया जा रहा था और ज्ञानी पंडितो को बुलाकर बच्चे का नाम संस्करण करवाया जा रहा था।

बच्चे की सारी जन्म – कुंडली देखने के बाद पड़ित बोले – महाराज, राज कुंवर बहुत ही अच्छे नक्षत्र में पैदा हुए हैं इसलिए हम इनका नाम परीक्षित रखते हैं।

राजा पारिक – बहुत ही सुंदर नाम है, हम आज से कुवंर को परीक्षित ही बुलाएंगे।

Raja Parikshit Or Naag Lok Hindi Story. Celebrating when Raja Parikshit was born.

तो दोस्तों इधर राजा पारिक की नगरी में तो खुब खुशियां मनाई जा रही थी लेकिन मैं यहां का हाल छोड़ कर आपको राजा बासिक कि नगरी का हाल सुनाता हूं।

राजा बासिक अपने दरबार में मंत्री – गणो के साथ एक गहन वार्ता में व्यस्त थे कि तभी एक बांदी दरबार में आई और बोली, महाराज की जय हो आपको जानकर अति प्रसन्नता होगी कि महल में रानी ने एक बहुत ही खूबसूरत कन्या को जन्म दिया है। इतना सुनते ही राजा बासिक के चेहरे पर उदासी के बादल छा गए। राजा गहन चिंता में डूब गए। अब बांदी तो चली गई किन्तु दरबार में एक सन्नाटा छोड़ गई।

राजा को इस कदर खामोश देखकर आखिरकार मंत्री गणों ने पुछा, महाराज क्या बात है, इतनी खुशखबरी की बात सुनकर भी आप खामोश है, कृपा आप हमें बताइए ताकि उस पर विचार कर सके ? लेकिन राजा तो गहन चिंता के अंधकार में डूबे हुए थे। लेकिन मंत्रियों के यूं बार – बार प्रार्थना करने पर राजा को अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी और उन्होंने राजा पारिक के साथ हुई अपनी यादगार मुलाकात के बारे में सभी को बता दिया।

राजा की सारी बात सुन कर सभी मंत्रीगण बोले – किन्तु महाराज इसमें चिंता की क्या बात है ? यह तो बहुत ही प्रसंन्नता की बात है जो हमारी राज कुमारी पृथ्वी लोक के राजा पारिक के घर की बहु बनेंगी। हम धूम – धाम से राजकुमारी की शादी करेंगे।

राजा बासिक – नहीं हम ऐसा ही तो नहीं करना चाहते क्योंकि हम राजा पारिक के यहां लड़की ब्याते हैं तो हमारा सिर सदा ही झुकता रहेगा क्योंकि हम लड़की वाले हैं। लड़की वालों को सदा ही झुकना पड़ता है। हमने सोचा तो कुछ और था लेकिन उसका उल्टा हो गया। अब हम वादा खिलाफी भी नहीं कर सकते। इस परिस्थिति ने हमे चिंता के बादलों में घेर लिया है। लेकिन कुछ भी हो हम हमारी लड़की को पारिक के लड़के के साथ कभी नहीं ब्यायेंगे। फिर राजा मन में कुछ विचार करते हुए गद्दी से खड़े हो गए और महल की ओर चल दिए।

Raja Parikshit Or Naag Lok Hindi Story.

महल जाकर राजा बासिक देखते हैं कि रानी बड़े ही प्यार से लड़की को दुलार रही थी और बहुत ही खुश दिख रही थी। सभी बांदीया रानी और राजकुमारी पर पंखा डोल रही थी। वहां का वातावरण काफी खुशनुमा था। अचानक राजा को आया देखकर सभी बांदी व नौकर कक्ष से बाहर चले जाते गए। राजा, रानी के पास बैठ जाते गए और लड़की को गोद में लेकर कहते हैं, रानी वास्तव में राजकुमारी तो बहुत ही सुंदर है, “लेकिन”।

रानी ( घबराते हुए ) – “लेकिन” क्या महाराज ?

राजा बासिक – रानी यह लड़की जिंदा नहीं रहेगी इसकी उम्र बस इतनी ही थी।

यह बात सुनते ही रानी कि आंखो से जल की धारा बहने लगी और रोते – रोते बोली – मगर क्यों महाराज, आखिर क्यों यह जिंदा नहीं रहेगी, इसका क्या कसुर है, जो आप इसके लिए ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

राजा बासिक – क्योंकि यह एक लड़की है लड़का नहीं, जिसने मेरा सिर झुकाने के लिए मेरे महल में जन्म लिया है।

राजा के अपनी ही बेटी के लिए ऐसे विचलित कर देने वाले शब्द रानी के हृदय को छल्ली कर रहे थे। जिन्हे रानी केवल अपने आंसूओ से बया कर पा रही थी। रानी अपनी बतकिश्मति पर फूट-फूट कर रो रही थी।

राजा बासिक – अब रोना धोना हो गया हो तो मेरी बात ध्यान से सुनो फिर राजा बासिक ने रानी को उस यादगार मुलाकात के बारे में सारी बात बता दी और कहां मैं सिर झुकाना नहीं चाहता, मैं तो राजा पारिक का सिर झुकाना चाहता हूं।

लेकिन महाराज इसमें सिर झुकाने की क्या बात है लड़की तो पराई अमानत होती है रानी ने समझाते हुए कहां और महाराज इसमें बुराई क्या है ? आप हमारी राजकुमारी को राजा पारिक के पुत्र से ब्याह दिजिए। इसमें आपकी बहुत प्रसंन्ना होगी कि फला राजा जबान का पक्का निकला और वादे के अनुसार अपनी राजकुमारी को पृथ्वी लोक में राजा पारिक के लड़के से ब्याही।

इतनी बात सुनकर राजा बासिक गुस्से मे बोले, बकवास बंद कर और मेरी बात ध्यान से सुन अगर आज रात तक तुने राजकुमारी को नहीं मारा तो मैं कल आकर साथ में तेरे भी टुकड़े – टुकड़े कर दूंगा। ऐसे कढ़वे वचन कहकर राजा गुस्से में वहां से चले गए। रानी सुन्न रह गई और फूट-फूट कर रोती रही।

दोस्तो अगले भाग में आप पढ़ेंगे की क्या नाग लोक के राजा बासिक अपनी दुश्मनी की आड़ मे राजकुमारी को मौत के घाट उतार देंगे ? आखिर वो कौन – सी दुश्मनी थी जिससे पृथ्वी लोक के राजा पारिक अभी तक बिल्कुल अंजान थे ? आखिर क्यों राजा बासिक, राजा पारिक को नीचा दिखाना चाहते थे ? क्या इन सब का खामियाजा परीक्षित को भरना पड़ेगा जिसे इन सब बातो की भनक तक नहीं ? जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लोग वर्तमान सोच (wartmaansoch.com) के साथ।

कमेंट करके जरूर बताए आपको यह भाग कैसा लगा और क्या आप चाहते है की हम अगले भाग जल्द से जल्द प्रकाशित करें ?

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-2

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