Raja Bhoj ( infographics ). Raja Bhoj Story In Hindi Part Eight.

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-6 । Raja Bhoj Story In Hindi Part Six

Raja Bhoj Story In Hindi Part Six-6

सभी तोते बेचारे डरे, सहमे राजा भोज बने तोते पर आश लगाए बैठे रहे और बोले प्रधान जी हमें तो आप जैसा सुझाव देंगे हम उसी का पालन करेंगे। कृपा आप ही हमारा मार्ग तय करें। राजा भोज पर अब 99 तोतो की सुरक्षा का भार था। वह अपनी चतुराई से उन सभी दोस्तों को बचाते रहे लेकिन होनी को कुछ ओर ही मंजूर था।

एक दिन सभी सौ तोते रात के समय पेड़ पर बैठे मंत्रणा कर रहे थे। तभी उनमें से एक तोते ने देखा एक शिकारी अपने कंधों पर धनुष – बाण एवं कमर पर दरात बांधे और हाथ में बोंरा लिए उनकी दिशा में बड़ा चला आ रहा था। उसने तुरंत अपने प्रधान यानी राजा भोज को इसकी सूचना दी। शिकारी को यूं आता देख राजा भोज ने तुरंत एक योजना बनाई और सभी तोतो को समझाया, देखो उड़ने की गलती बिल्कुल भी मत करना क्योंकि इसके हाथ में धनुष – बाण है, अगर हमने उड़ने की कोशिश कि तो हममें से दो या तीन तो जरूर मारे जाएंगे।

इसीलिए जैसा मैं कहता हूं वैसा ही करना। सभी डरे सहमे और भयभीत तोतो ने तुरंत हामी में अपना सिर हिलाया। फिर राजा भोज उन्हें अपनी रणनीति समझाते हुए बोले देखो, पहले यह शिकारी पेड़ के पास आएगा और एक ही पेड़ पर इतने सारे तोते देखकर प्रसन्न हो जाएगा जिसके परिणाम स्वरुप यह लालच में सारे तोते पकड़ने की सोचेगा। जिसके लिए यह हम पर बाण तो नहीं चलाएगा क्योंकि बाण चलाने से वह दो या तीन तोते ही पकड़ सकता है, बाकियों को नहीं तो आप सबको एक नाटक करना होगा। जिससे शिकारी सोचे कि यह तो पहले से ही मरे हुए हैं।

कहने का मतलब है आप सब अपनी गर्दन इस कदर लटका दो जिससे ऐसा प्रतीत हो जैसे हम मरे हुए हैं, फिर शिकारी ऊपर पेड़ पर चढ़ेगा और हमें एक-एक कर नीचे गिराएगा। तब आप लोग एक बात का विशेष ध्यान रखना कि जैसे ही शिकारी एक तोते को नीचे पटकेगा वैसे ही आवाज आएगी ‘पट’। फिर दूसरे को पटकेगा तो आवाज आएगी ‘पट’ फिर तीसरे को पटकेगा तो आवाज आएगी ‘पट’।

पट की आवाज को गिनते रहना क्योंकि धीरे-धीरे वह हम सब को नीचे पटकता रहेगा और जैसे ही पट की सौवीं आवाज पूरी हो जाए तब सारे एक दम उड़ जाना। इससे फायदा यह होगा कि उस वक्त शिकारी तो पेड़ पर होगा और हम सब भागने में कामयाब हो जाएंगे और इस वक्त उसके पास धनुष – बाण भी नहीं होंगे।

सभी तोतो ने कहां, ठीक है प्रधान जी और सभी तोते पेड़ की टहनियों पर ऐसे गर्दन लटका कर लेट गए जैसे सभी मरे हुए हैं।

अब शिकारी पेड़ के पास पहुंचता है और एक ही पेड़ पर इतने सारे तोते देखकर काफी प्रसन्न हो जाता है। क्योंकि इतने सारे तोते उसे बड़ा धनवान बना सकते थे। वह मन ही मन भगवान को धन्यवाद कहते हुए बोला, भगवान तू कितना दयालु है मुझे एक ही जगह इतने सारे तोते मिल गए वह भी मरे हुए। मुझे हत्या भी नहीं करनी पड़ेगी और ढेर सारे सोने के सिक्के भी मिल जाएंगे।

शिकारी ने अपने धनुष – बाण और बोरा नीचे रखा और पेड़ पर चढ़ गया। प्रसंता से व्याकुल शिकारी एक-एक करके तोते नीचे पटकने लगा।

शिकारी अपना कार्य शुरू कर चुका था। वह एक – एक कर सभी तोतो को नीचे पटकने लगा जैसे ही एक तोता नीचे गिरता ‘पट’ की आवाज होती। सभी तोते उस आवाज की गिनती करने लगे। आवाज की गिनती 99 तक पहुंच गई थी। अतं में बचे थे राजा भोज जिनको शिकारी नीचे फंकने ही वाला था कि उससे पहले शिकारी का दरात धरती पर आ गिरा। अब सौं की गिनती पूरी हो चुकी थी। अंतीम आवाज सुनते ही सभी नीचे पड़े तोते फूर से उड़ गए। लेकिन शिकारी के हाथ में रह गए राजा भोज।

चूंकी राजा भोज प्रधान थे इसलिए वह सबसे ऊंची टहनी पर बैठे थे। बाकी 99 तोते उड़ चुके थे लेकिन राजा भोज बना तोता शिकारी के हाथ लग चुका था। शिकारी तोतो की चतुराई से काफी गुस्से में था। ऐसे धोखे की रासलीला देखकर वह आग बबूला हो गया था।

शिकारी ( राजा भोज बने तोते को बोला ) – मेरे साथ तुमने बड़ा धोखा किया है लेकिन मैं तुझे अपने हाथ से जाने नहीं दूंगा। कम से कम मुझे एक सोने का सिक्का तो मिलेगा।

शिकारी पेड़ से नीचे उतरा और राजा भोज बने हुए तोते को अपने हाथों में पकड़ नगरी की तरफ चल दिया। चलते – चलते रास्ते में तोते ने कहां, शिकारी भाई।

शिकारी इधर-उधर देखने लगा और बोला मुझे किसने आवाज लगाई है ? चूंकी राजा भोज बना तोता मनुष्य की भांती बोल सकता था। उसने कहां, भाई मैं बोल रहा हूं तोता जिसे तुमने पकड़ रखा है।

शिकारी ( थोड़ा हैरान होकर ) – वाह यार तू तो हमारी जैसी भाषा बोल रहा है।

तोता – शिकारी भाई तुम मुझे कहां ले जाओगे ?

शिकारी – मैं तुझे राजा के पास लेकर जाऊंगा जहां मुझे एक तोते के बदले एक सोने का सिक्का मिलेगा।

तोता – भाई तुम मुझे राजा के पास लेकर मत जाओ इसकी जगह तुम मुझे किसी सेठ के पास ले कर चलो। मैं उस सेठ से तुम्हें दस सोने के सिक्के दिलाऊंगा।

शिकारी ( अचंभे में ) – दस सोने के सिक्के।

तोता – हां भाई बिल्कुल मैं तुम्हें दस सोने के सिक्के दिलाऊंगा।

शिकारी – तो ठीक है, मैं तुझे एक सबसे अच्छे सेठ के पास लेकर चलता हूं।

तोते के चेहरे पर अब कुछ खुशी के अक्षर नजर आए। शिकारी उसे लेकर एक सेठ के पास पहुंच गया। वहां जाकर शिकारी बोला, सेठ जी यह तोता मैंने जंगल से पकड़ा है, जिसे मैं आप को बेचना चाहता हूं।

सेठ – भाई भला मैं इस तोते का क्या करूंगा ? इसे ले जाकर राजा को दे दे, तुझे एक सोने का सिक्का मिल जाएगा।

शिकारी – लेकिन यह तोता कहता है, मुझे राजा को नहीं अपितु किसी सेठ को बेच दो। आप खुद ही इससे बात कर लो।

सेठ ( अचम्बे में ) – क्या यह तोता बोलता है ?

शिकारी – जी सेठ जी, यह तोता बोलता है, बहुत ही समझदारी भरी बातें करता है।

सेठ – ठीक है अंदर लेकर आजा।

फिर सेठ शिकारी व तोते को अंदर लेकर गया और बैठकर तोते से विचार – विमर्श करने लगा। तोते ने कहां, सेठ जी आप मुझे दस सिक्को में इस शिकारी से खरीद लीजिए। मैं इन दस सिक्को के बदले आपको एक लाख सिक्कों की आमदनी करवा कर दुंगा। अगर आप मुझे नहीं खरीदोगे तो यह शिकारी मुझे राजा को सौंप देगा और वहां मुझे समाप्त कर दिया जाएगा। सेठ अचंभित था क्योंकि एक तोता उसके सामने बैठकर इतनी समझदारी भरी बातें कर रहा था। सेठ ने तुरंत दस सिक्के निकाले और शिकारी को दे दिए।

अब तोते ने शिकारी से का शिकारी अपने ईमान पर रहना किसी को बताना मत कि मैंने फला सेठ को तोता बेचा है। शिकारी ने हामी भरी और खुशी – खुशी अपने घर चला गया। अब सारा मामला शांत होने के बाद सेठ ने तोते से कहां, भाई तू मेरी लाखों की कमाई भला कैसे करवा सकता है ? तोते ने कहां, देखो सेठ जी मैं जैसा कहता हूं वैसा आप करते जाओ। आपके पास धन की वर्षा होने लग जाएगी।

सेठ – ठीक है बता अब मैं क्या करूं ?

तोते ने कुछ सोचते हुए कहां, देखो सेठ जी कल तुम गुड़ खरीद लो, जितना भी खरीद सकते हो खरीद लो, क्योंकि एक सप्ताह बाद गुड़ का भाव दुगना हो जाएगा। सेठ ने ऐसा ही किया और पूरे शहर का गुड़ खरीद लिया दूसरे सप्ताह आया तो वास्तव में गुड़ का भाव दुगना हो चुका था। उसने वही गुड दूगने भाव में बेच दिया। अब सेठ को दुगना मुनाफा हुआ। इस मुनाफे से सेठ बड़ा खुश था कि वास्तव में यह तोता तो बड़ा ही ज्ञानी और समझदार है। सेठ तोते को बड़े ही प्यार से रखने लगा उसे प्रतिदिन अच्छा – अच्छा खाना खिलाता और उसके लिए सभी जरूरत का सामान लाने लगा।

तो दोस्तों सेठ रोज तोते से सलाह – मशवरा करता और जो बात तोता कहता, सेठ वही करता। तोता सेठ को सलाह देते हुए कभी रूई खरीदने के लिए कहता, कभी लोहा खरीदने को, कभी चीनी खरीदने को मतलब धीरे-धीरे सेठ की सभी तिजोरियां भरने लगी। अब सेठ बड़ा खुश था। तो एक दिन सेठ तोते से कहने लगा, तोता भाई मैं तेरी वजह से आज मालामाल हो गया हूं। तू बता आज क्या चाहता है, मैं तेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं।

सेठ की इतनी बात सुनकर तोता उदास हो गया। सेठ ने कहां, तोता भाई तू उदास है, बता मुझे क्या बात है ? धीरे – धीरे तोते की आंखों से आंसू टपकने लगे। तोते की आंखों में आंसू देख कर सेठ ने कहां, तोता भाई मुझे माफ कर दे, मैं अपनी कमाई के चक्कर में आज तक तेरा दुख – दर्द तो पूछ ही नहीं पाया लेकिन अब तेरी वजह से मेरे पास बहुत धन हो गया है। अब तू अपने बारे में बता, तोते ने कहां, देखो सेठ जी किसी को बताना मत मैं अपने बारे में आपको सारी बात बताता हूं।

सेठ ने कहां, तू मेरा विश्वास कर तोते भाई मैं किसी को नहीं बताऊंगा। तो तोते ने कहां, सेठ जी मैं वास्तव में कोई तोता नहीं बल्कि राजा भोज हूं। फिर तोते ने बाजीगर से लेकर पंद्रवी विद्या तक की सारी बात सेठ को बता दी और अंत में तोते ने कहां की यह तोता मार अभियान भी मुझे खत्म करने के लिए ही बनाया गया है। सेठ पूरा किस्सा सुन दंग रह गया और तोता बने राजा भोज के पैरों में गिर गया।

गिर कर कहने लगा महाराज मुझे माफ कर दो मुझसे बड़ी गलती हुई है। मैंने इतने बड़े महाराज को एक नौकर की तरह रखा है, कृपा मुझे क्षमा करें और मेरे लायक कोई सेवा हो तो मुझे अवश्य बताए। तोते ने कहां, आपकी कोई गलती नहीं है, ये तो मुझे मेरे कर्मों का दंड मिल रहा है, लेकिन आप कुछ कर सकते हो तो मुझे किसी भी तरीके से एक बार छुपाकर रानी सत्यवती के पास पहुंचा दो, तो आपकी बड़ी कृपा होगी।

सेठ – ठीक है महाराज मैं किसी भी तरीके से आपको रानी सत्यवती के महल तक जरूर पहुंचांउगा। चाहे मुझे कितने भी खतरों का समना क्यों ना करना पड़े।

दोस्तों भाग 7 में आप पढ़ेंगे की क्या राजा भोज रानी सत्यवती तक पहुंच पाएंगे ? और अगर पहुंच पाएंगे तो क्या प्रतिक्रिया होगी रानी की जब एक तोता अपनी पत्नी सत्यवती से अपनी मुंछ का बाल मांगेगा ? क्या असली राजा भोज को अपना शरीर वापस मिल पायेगा ? इन सभी कार्यो को करने में अभी किस – किस समस्या का सामना करना होगा राजा भोज को ?  जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लॉग वर्तमान सोच (wartmaansoch) के साथ। कमेंट करके जरूर बताये यह भाग आपको कैसा लगा ? ताकि हम जल्द से जल्द अगले भाग प्रकाशित करते रहे।

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-1

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-2

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-3

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-4

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-5

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-7 

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