राजा भोज कहानी सीरीज

राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-7 । Raja Bhoj Story In Hindi Part Seven

Raja Bhoj Story In Hindi Part Seven – 7

सेठ अपने वचन अनुसार राजा भोज बने तोते को रानी सत्यवती से मिलाने के लिए काफी आतुर था। फिर एक दिन उसने योजना बनाई और तोते को अच्छी तरह छुपा कर राजा भोज की नगरी की तरफ चल दिया। दो-चार दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह राजा भोज की नगरी में पहुंच गया और रानी सत्यवती के महल के बाहर जाकर बैठ गया क्योंकि यह मसला इतना गंभीर था, कि वह हर किसी से इसके बारे में बात नहीं कर सकता था।

सेठ को फुक – फुककर अपने कदम रखने पढ़ रहे थे, लेकिन सेठ करें तो क्या करें महल के अंदर जाना उतना ही मुश्किल था जितना कि एक गरीब आदमी का मोदी से मिलना हो। सेठ महल के बाहर बैठा रहा उम्मीद लगाए कि भगवान एक रास्ता जरूर निकालेगा। अचानक सेठ ने देखा की एक बांदी (नौकरानी) महल से बाहर आई। सेठ ने तुरंत अपना दिमाग दौड़ाया कि आगे का काम यह बांदी ही कर सकती है। वह भागा और तुरंत बांदी के पास जा पहुंचा।

सेठ (बांदी से) – बहन कृपा आप मेरा एक कार्य कर दीजिए। मुझे किसी भी तरह एक बार रानी सत्यवती से मिलवा दीजिए।

बांदी (गुस्से में) – क्या रानी सत्यवती से मिलना दूं ? हमारी रानी के इतने भी बुरे दिन नहीं आए की वह राह चलते किसी भी अरे – गरे से मिले। जाओ चले जाओ यहां से।

सेठ – बांदी आप किसी भी तरह यह समाचार रानी तक पहुंचा दो कि एक सेठ बहुत दूर से पैदल यात्रा करते हुए एक गंभीर समस्या लेकर आपसे मिलने आया है। इसके बदले मैं आपको पच्चास सोने के सिक्के दूंगा।

पच्चास सोने के सिक्कों के नाम से बांदी के चेहरे पर चमक आ गई। उसने मन ही मन सोचा इतने से काम के पच्चास सोने के सिक्के।

बांदी – लाओ सेठ पहले मुझे पच्चास सोने के सिक्के दो तभी मैं रानी के पास जाकर आपका समाचार पहुंचाउगी।

सेठ ने तुरंत उसे पच्चास सिक्के थमा दिए। सिक्के अपने पल्हू में बांधकर वह दौड़ती हुई रानी सत्यवती के पास गई और रानी से बोली, महारानी एक सेठ बहुत दूर से पैदल सफर करते हुए आपसे मिलने आए है। शायद बेहद ही गंभीर समस्या पर विचार करना चाहते है। यदि आप आज्ञया दे तो मैं उन्हे बुलाउ।

रानी सत्यवती – ठीक है बांदी, उसे हमारे पास लेकर आओ।

बांधी भागी गई और सेठ को रानी सत्यवती के महल के भीतर ले आई। जब सेठ रानी के पास पहुंचा तो रानी ने देखा कि सेठ की आंखें छलक रही थी। उसने हाथ जोड़कर रानी से विनती करी कि रानी केवल एक मिनट में आप से अकेले में वार्ता करना चाहता हूं। रानी सत्यवती एक कोमल हृदय की महिला थी किसी अनजान व्यक्ति की आंखों में पानी देख उसका मन पसीजने लगा था। रानी ने तुरंत सभी बांदीयों और पहरेदारों को बाहर जाने का आदेश दिया।

जैसे ही सब बाहर गए सेठ ने अपनी चादर हटाई और तोता बने राजा भोज को बाहर निकाला और बोला महारानी यह कोई ओर नहीं बल्कि स्वयं राजा भोज है। किसी अनजान के मुख से ऐसे शब्द सुनते ही रानी का हृदय जोर-जोर से धड़कने लगा। वह इस पहेली को समझ नहीं पा रही थी, राजा भोज वह भी एक तोता कैसे ? रानी के ह्रदय में सवाल बढ़ते जा रहे थे। एक क्षण के लिए वह मौन हो चुकी थी।

फिर सेठ ने धीरे से कहां, रानी आप इन्हें संभालिए मेरा कार्य यहीं समाप्त होता है बाकी कि सारी दास्तां स्वयं राजा भोज(तोता) आपको बता देंगे।

रानी ( अपने ह्रदय को सराहती हुई बोली ) – रुको सेठ जब तक कि यह सिद्ध नहीं हो जाता कि यह राजा भोज है आप यही रहेंगे। यदि आपकी बात सच साबित हुई तो राजा भोज की आने की खुशी में आप के नाम पर एक भव्य समारोह किया जाएगा और यदि आप हमारे साथ कोई मजाक कर रहे है तो आपको ऐसा दंड दिया जाएगा जिसकी कल्पना आपने कभी नहीं की होगी।

रानी और सेठ की इतनी बातें सुनकर उस पिछे बैठे तोते ने धीरे से कहां, रानी क्या आज भी आपके पास हमारी मूंछ का बाल सुरक्षित रखा है ? यह कथन सुनते ही रानी बोलती – बोलती एकदम सुन्न पड़ गई और धीरे-धीरे अपनी नजरें उस तोते की तरफ घुमाई जिसकी आंखों से जिज्ञासा के आंसू बह रहे थे। अपने स्वामी से इतने वर्षों बाद मिलकर जो इस अवस्था में उनसे मिले थे, उन्हे गले लगाकर रानी फूट-फूट कर रोने लगी।

रानी ने सेठ का तहे दिल से धन्यवाद दिया और उन्हें मेहमान गृह में ठहरने को कहां। रानी ने बांदीयों को बुलाकर आदेश दिया की यह सेठ हमारे शाही महमान है इन्हे किसी भी तरह की समस्या नहीं होनी चाहिए। सेठ ने मुस्कराते हुए अपना सर हिलाया और मेहमान गृह की ओर चल दिए।

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अब रानी को राजा भोज (तोते) ने अपनी पूरी दास्तान सुना डाली कि कैसे नाई ने उनके साथ इतना बड़ा धोखा किया है। रानी ने भी उसके महल में आने के पश्चात राजा भोज (तोते) को उसकी सारी कहानी सुनाई और बोली महाराज ये तो मैं उसके महल में आते ही समझ गई थी कि यह बहरूपिया कोई ओर है, मेरे महाराज नहीं क्योंकि मैंने उससे आते ही वह निशानी मांगने को कहां जो आप मुझे सौंप कर गए थे। जिसे देने में असमर्थ हो गया और नए – नए बहाने बनाने लगा।

इतनी वार्ता करने के बाद रानी सत्यवती बोली – महाराज आप एक पंद्र विद्या निदान शासक है तो कृपा आप ही इस समस्या का समाधान करिए।

दोस्तो नाई कितना भी चालाक क्यों ना हो वह केवल पंद्रवी विद्या जानता था किंतु राजा भोज पुरी एक से लेकर पंद्र विद्या तक सभी जानते थे। अब असली राजा भोज को रानी सत्यवती का साथ मिल चुका था। उन्होंने इस दुख से छुटकारा पाने के लिए गंभीर योजना बनाई और रानी सत्यवती से बोले…..

राजा भोज (तोता) – देखो रानी केवल सेठ और आपको ही मालूम है कि मैं महल में आ चुका हूं और किसी को भी इसकी सूचना नहीं है और ना ही मिलनी चाहिए। अब जो मैं आगे कहूंगा आपको वही करना होगा।

रानी सत्यवती – जी महाराज, आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगी कृपा आप मुझे आगे की योजना बताइए।

राजा भोज (तोता) – रानी सबसे पहले आप सैनिकों से कहकर एक मरा हुआ बकरा मंगवाइए और एक बांदी से कहकर नाई के पास संदेशा भिजवाइए जिसमें आप उससे माफी मांगते हुए महल में आने का आग्रह करना चाहती है और मुझे किसी ऐसे स्थान पर छुपा दिजिए जहां से केवल मैं आपको देख सकूं आप लोग मुझे ना देख सके।

दोस्तों भाग – 8 में आप पढ़ेंगे राजा भोज की आगे कि पूरी योजना। आखिर क्यों राजा भोज ने एक मरा हुआ बकरा मंगवाया ? क्या उनकी यह योजना काम करेगी ? क्या नाई को इस परपंच की सुचना मिल जाएगी ? या अब वह समय आ चुका था जब सबके सामने खुलेंगे नाई के भेद और असली राजा भोज को मिलेंगा अपना शरीर ? जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लॉग वर्तमान सोच (wartmaansoch) के साथ।

दोस्तों कमेंट करके जरूर बताए, यह भाग आपको कैसा लगा ? ताकि हम जल्द से जल्द अगले भाग प्रकाशित करते रहे।

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