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राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-8 । Raja Bhoj Story In Hindi Part Eight

Raja Bhoj Story In Hindi Part Eight-8

रानी सत्यवती राजा भोज की पूरी योजना अच्छी तरह समझ चुकी थी,फिर उसने योजना अनुसार एक बांदी को बुलाया और उसके द्वारा रानी ने राजा भोज बने नाई तक एक संदेशा भिजवाया। जिसमें रानी राजा (नाई) से माफी मांगते हुए अब उन्हें महल में बुलाना चाहती हैं।

बांदी रानी का संदेशा लेकर तुरंत राजा बने नाई के पास गई जो रानी भानुवति के महल में विश्राम कर रहा था। वहां जाकर बांदी राजा (नाई) से बोली, महाराज रानी सत्यवती ने आपको याद किया है, वह अपने कर्मों पर पश्चाताप करते हुए आपसे माफी मांगना चाहती हैं। रानी ने आप के साथ सभी मंत्री गंण को भी आमंत्रित किया है ताकि वह सबके सामने आपसे माफी मांग सके। कृपा अब आप चलिए, रानी आप की आरती करते हुए महल में आप का भव्य स्वागत करना चाहती है। यह सारी बात बांदी ने राजा बने नाई को हाथ जोड़कर कह डाली।

राजा (नाई) – आखिरकार रानी सत्यवती को अक्कल आ ही गई। ठीक है, जाकर रानी से कह दो, हम शीघ्र ही समस्त मंत्री गण के साथ महल में पधार रहे हैं। हमारे स्वागत की तैयारी करों।

रानी सत्यवती को पूरा विश्वास था कि इस संदेश के साथ राजा (नाई) जरूर आएगा। इसलिए रानी ने तोता बने राजा भोज को एक कपड़े से ढक कर कक्ष के रोशनदान में छुपा दिया ताकी तोता वहां से सारा दृश्य देख सके। इस कार्य से निजात पाकर रानी राजा (नाई) और मंत्रियों की आने की प्रतीक्षा करने लगी।

थोड़ी देर बाद रानी ने देखा राजा (नाई) समस्त मंत्री गणों के साथ महल की ओर पधार रहा था। राजमहल के द्वार पर पहुंचते ही रानी ने अपने ऊपरी मन से राजा (नाई) की आरती की और हाथ जोड़कर कहने लगी, महाराज मैं अपनी गलती पर अति शर्मिंदा हूं जो मैंने आपको महल में प्रवेश करने से रोका किंतु आप यह भली-भांति जानते हैं कि मैं एक पतिव्रता स्त्री हूं। इस कारण मुझे फूंक-फूंक कर कदम रखने पड़ते हैं, कृपा अब आप मुझे क्षमा का दान दें।

अपनी बात को आगे बढ़ाती हुई रानी बोली, महाराज मैं आपकी बात से सहमत हूं कि इतनी पुरानी बातें याद थोड़ी ही रहती हैं लेकिन मैं आपको याद दिलाना चाहती हूं कि जब आप पंद्रवी विद्या सीखने जा रहे थे, तब आप मुझे निशानी के तौर पर कहकर गए थे की रानी सत्यवती मैं जब भी पंद्रवी विद्या सिखकर वापस आऊंगा, सबसे पहले इसका चमत्कार आपको ही दिखाऊंगा तो आप समझ जाना कि मैं ही राजा भोज हूं।

लेकिन महाराज वापस आने के बाद आपने मुझे कोई भी चमत्कार नहीं दिखाया जिस कारण मुझे आपके साथ ऐसा व्यवहार करना पड़ा। इसीलिए महाराज मैं आपसे प्रार्थना करती हूं कि सभी के सामने अपनी पंद्रवी विद्या का चमत्कार दिखाइए ताकि मैं अपने महाराज पर गर्व कर सकु।

इतनी वार्ता – लाप के बाद राजा (नाई) मन ही मन प्रसन्न हो गया। वह खुद भी सबके सामने अपनी विद्या दिखाने के लिए आतुर था, लेकिन उसे इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि असली राजा भोज वहां मौजूद होकर उसकी सारी रास – लीला देख रहे थे और केवल उस एक मौके की तलाश में बैठे थे जब नाई एक क्षण के लिए राजा भोज के शरीर से बाहर निकले।

राजा (नाई) – ठीक है, रानी बताइए क्या देखना चाहेंगी आप ?

रानी ने तुरंत अपने नौकरों से कहकर उस मरे हुए बकरे को मंगवाया। रानी के आदेश अनुसार नौकर मरा हुआ बकरा लेकर आए और उसे राजा (नाई) के सामने पटक दिया।

रानी – महाराज मैं चाहती हूं कि आप एक बार अपने प्राण इस मरे हुए बकरे में डाल इसे जीवंत कर अपनी विद्या का परिचय दे।

राजा (नाई) – ठीक है, इसमें कौन – सी बड़ी बात है। यह तो मेरे बाएं हाथ का खेल है।

नाई मन ही मन मंत्र पढ़ने लगा और कुछ ही क्षण बाद राजा का शरीर प्राण – हीन होकर जमीन पर गिर गया और मरा हुआ बकरा जीवंत हो उठा। अब नाई के प्राण बकरे में बस चुके थे। उधर रोशनदान में बैठा तोता (राजा भोज) इसी एक क्षण की तलाश में थे। उन्होंने भी तुरंत मंत्र पढ़े और अपने प्राण खुद के यानी राजा भोज के शरीर में डाल दिए फिर तोता प्राण – हीन होकर गिर गया।

वहां मौजूद समस्त जन अचम्भे में थे कि यह हो क्या रहा है ? अचानक राजा भोज ने कहां जो कि अपने असली रूप में आ चुके थे।

राजा भोज – बेड़िया लाओ, मोटी – मोटी जंजीरे लेकर आओ इस बकरे को अच्छी तरह से बांधो ताकि यह भाग ना पाए।

राजा का आदेश सुन तुरंत बेड़िया लाई गई और बकरे को अच्छी तरह से बांध दिया गया। मामला शांत होने के बाद राजा भोज ने अपनी सारी आप -बीती वहां मौजूद समस्त मंत्री गणों को सुनाई और कहां, भला हो इस सेठ का जिसने मेरी काफी मदद की और अछाई का साथ दिया। राजा की बात सुन सभी मंत्री गण बोले – महाराज हमें क्षमा करें जो हम इस नकली राजा को पहचान ना सके किंतु हमें इस पर संदेह तभी हो गया था जब इसने तोता मार अभियान चलाया था। कृपा अब आप ही इसकी सजा मुकरर करें।

राजा भोज – इसके लिए मृत्युदंड पर्याप्त नहीं है, इसे हम ऐसी सजा देंगे जिससे यह सारी जिंदगी पछताता रहेगा। इस बकरे को नगरी के मुख्य द्वार पर बांध दिया जाए और समस्त प्रजाजन मे यह घोषणा करा दि जाए की राजा का आदेश है जो भी प्रजाजन नगरी से बाहर जाएगा वह इसके सिर पर पांच जूते मार कर ही जाएगा और कोई अंदर आएगा वह भी पांच जुते मारकर आएगा।

ऐसा ही हुआ बकरे को नगरी के मुख्य द्वार पर बांध दिया गया और वहां पहरेदार बैठा दिए गए। पहरेदार को सख्त आदेश दे दिया गया कि कोई भी आए या जाए इसे पांच जूते मारे बगैर नहीं आ – जा सकता। इधर राजा भोज ने मरे हुए तोते का अंतिम संस्कार बहुत ही सादर – सम्मान के साथ करवाया। अब राजा भोज ने अपना राज्य पाठ भी खुशी-खुशी संभाल लिया था।

दोस्तों इसी के साथ हमारी राजा भोज की कहानीयों की सीरीज यही समाप्त होती है, लेकिन चिंता मत कीजिये क्योंकि अब हम आपके लिए लाएंगे एक ओर अनोखी और अनसुनी कहानीयों की सीरीज जो “नाग लोक के राजा बासिक” पर आधारित है। अगर आप चाहते है कि यह सीरीज हम जल्द से जल्द प्रकाशित करें तो कृपा कमेंट करके जरूर बताएअगर आप चाहते है कि अगली सीरीज की Notification तुरंत आप तक पहुंचे तो आप हमसे [email protected] द्वारा भी जुड़ सकते है।

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2 thoughts on “राजा भोज चौहदा विद्याओं का घमंड भाग-8 । Raja Bhoj Story In Hindi Part Eight”

  1. अगर गेट पर बकरी के सामने कोई मरा हुआ आदमी दिख जाऐ तो वो फिर उसमें प्राण डाल लेगा तो क्या होगा

    1. आपका प्रश्न बिल्कुल सही है, जैसा आप कह रहे है अंत मे ऐसा ही होता है, लेकिन हमें यह कहानी यही समाप्त करनी पड़ी क्योंकी यह कहानी हमने गांव के बुजुर्ग लोगों से एकत्रित की थी, जो अब जीवित नहीं है। आगे की कहानी वहां मौजुद लोगों मे किसी को भी नहीं पता लेकिन सभी को इतना जरूर मालूम है जो आपके लिए जानना जरूरी है की अंत मे नाई अपने प्राण एक मरे हुए मुर्गे मे डाल लेता है जिसमें उसका साथ रानी भानुवती देती है और अंत मे राजा भोज ने भी अपने प्राण एक बिल्ली में डाले और उस मुर्गे का अंत किया।

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