खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है। Personal Improvement In Hindi. Nelson Mandela.

खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है। Personal Improvement In Hindi

Personal Improvement In Hindi- दोस्तों आज के दौर में यह पुख्ता हो चुका है कि इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी खुद पर काबू न रख पाना है । लेकिन वर्तमान समय में देखा जाए तो इसमें इंसान का कोई दोष नहीं होता क्योंकि आज का आविष्कारीक दौर इतना तीव्र हो चुका है कि हमें कई फैसले जल्दबाजी में लेने पड़ते हैं। आज प्रतियोगिता इतनी तेज हो चुकी है कि हर कोई जल्दी फैसले लेने को तैयार है।

लेकिन जल्दबाजी में फैसले लेना मतलब हमारी विचार शक्ति का गला घोंटना जिसका मूल कारण है हमारा खुद पर और अपने विचारों पर नियंत्रण ना होना। यदि आप यह कला सीखना चाहते हैं तो नेल्सन मंडेला द्वारा लिखित इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें

खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है
Personal Improvement In Hindi

खुद को शांत रखें। जब हम आपा खो देते है, तो हालात हाथ से निकल जाते हैं। कई बार ऐसे भी परिस्थितियां बन जाती हैं, जब काबू मुश्किल हो जाता है। आवेश में प्रतिक्रिया देने का मन होता है, लेकिन ऐसी परिस्थितियां कम ही बनती हैं। इन हालातों में प्रतिक्रिया स्वतःस्फूर्ति होने के बजाय नपी-तुली होनी चाहिए। नियंत्रण सच्चे लीडर की, बल्कि सच्चे इंसान की भी पहचान है। लीडर्स से लोग शांत बने रहने की उम्मीद करते हैं।

कई शोध-अध्ययनों का निष्कर्ष है कि विचार ही पदार्थ हैं। विचार ही जीवन का अंग बनकर चरित्र को विशेष स्वरूप प्रदान करते हैं और चरित्र ही हमारी आदतों पर, इच्छाशक्ति पर नियंत्रण रखता है। चरित्र के मुताबिक ही हमारे काम होते हैं। विचारों में डर, शंका या फिर विश्वास, जो भी मौजूद होगा। हमारा चरित्र भी उसी प्रकार से आकार लेना शुरू कर देगा। अमेरिकन प्रोफेसर डॉ. बारबरा फरेड्रिक्सन ने सालों तक सकारात्मकता पर शोध किया। वह लिखती हैं कि विचारों पर नियंत्रण ना हो या उनका प्रवाह नकारात्मकता की ओर हो, तो एक समय के बाद इसके दुष्भाव न सिर्फ आपके जीवन, कामकाज बल्कि स्वास्थ्य में भी नजर आने लगते हैं।

मशहूर लेखक विद्धान स्वेट मॉर्डेन कहा करते थे आशा और निराशा के दो रूप हैं। और इनमें से एक तीसरा रूप निकलता है- वह है अभिलाषा का। आशा और अभिलाषा किसी वस्तु का आकृति को गीली मिट्टी में तैयार करके उसे सांचे में ढाल देती है।

और कर्म जीवन में उसे सफेद पत्थर जैसा साकार, पक्का बनाकर प्रकट कर देता है। हमारा विश्वास वह उम्मीद और आशा है। दुनिया में ऐसी कोई खुशी नहीं जिसके लिए आपकी आत्मा बेचैन हो और वह आपको न मिले। लेकिन मनचाही खुशी तभी मिलेगी, जब आप खुद को उसके लिए योग्य बनाएंगे। इसलिए अपने विचारों और खुद पर नियंत्रण रखना जरूरी है। अविश्वास हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। कोरी कल्पना से कुछ नहीं होने वाला। कल्पना, आशा, विश्वास और परिश्रम मिलकर ही सफलता का दरवाजा खोलते हैं।

Personal Improvement In Hindi. The success door.

केपटाउन में मेरी पहली रैली में शामिल एक महिला ने कुछ दिनों बाद पत्र भेजा। कहा कि ‘उसे मेरे जेल से छूटने की खुशी है और वह चाहती है कि देश को संगठित करने के लिए मैं काम करूं। पर मेरे भाषण को बेहद उबाऊ बताया।’ लोग आपसे बस ये जानना चाहते हैं कि बुरे हालातों का सामना आप किस तरह करेंगे। वे बस चीजों को साफ और तर्कपूर्ण तरीके से समझना चाहते हैं।

मैं जब युवा था, तब परिवर्तन की खातिर हर किसी से विवाद करता था, ऊंची आवाज में बात करता था। युवा उम्र में ये सब सहज होता है। लेकिन जोशीलापन दिखाकर अस्पष्ट होने का कोई मतलब नहीं है। इससे बेहतर है कि शांत रहकर लोगों में भरोसा पैदा करें। अंततः: लोग भरोसा चाहते हैं, भले ही आप उत्साही वक्ता ना हों। आपकी बात और जवाब पूरे, स्पष्ट और हर चीज साफ समझाने वाले होने चाहिए।

हमारा मिजाज यानी टेम्परामेंट बदलता रहता है। जेल जाने से पहले मैं विद्रोही किस्म का अधीर इंसान था, लेकिन जेल से आने के बाद एकदम अलग किस्म का इंसान था। निर्णय लेने से पहले प्रतीक्षा करता, सारे विकल्पों पर विचार करता। मेरी जिंदगी की अधिकांश गलतियां जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण हुई, ना कि बहुत धीरे लिए फैसलों के कारण। जल्दबाजी न करें, सोचें, विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें।

साहस हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है। साहस का मतलब डर की गैरमौजूदगी नहीं है। 1994 में दक्षिण अफ्रीका के इतिहास में पहली बार लोकतांत्रित तरीके से चुनाव होने वाले थे। नटल नाम की जगह पर छोटे से प्रोपेलर प्लेन में समर्थकों को भाषण देने जनाना था। प्लेन का इंजन फेल हो गया था। प्लेन में मेरे साथ एक अगरक्षक माइक और पायेलटें थे। मैं स्थिति पर ध्यान न देकर न्यूज्पेपर पढ़ता रहा। लैडिंग के बाद स्वीकार किया कि मैं एकदम डर गया था।

इससे पहले भी कई मौकों पर मैं डरा। रिवोनिया मुकदमे के दौरान जहां उम्रकैद की सजा सुनाई तब डर लगा। रॉबन द्वीप पर जब पीटने की धमकी दी गई, तब डर महसूस हुआ। आपको डर लगता है, इसे स्वीकार करने में बुराई नहीं है। साहस मतलब डर से बाहर निकलने का हुनर सीखना है।

दोस्तो यह आर्टिकल वीरेंद्र सिंह द्वारा लिखित किताब महामानव नेल्सन मंडेला से साभार है यदि इसके बारे में आप विस्तार से पढ़ना चाहते है और मंडेला जी को और करीबी से जानना चाहते है तो आप यह किताब जरूर खरीदे। इसके साथ ही कॉमेंट करके जरूर बताइएगा की ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ताकि ऐसे ही प्रेरणादायक आर्टिकल्स हम आपके लिए लाते रहे। बुक पर क्लिक करें-

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