नागराज वासुकी और परिक्षित

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-3 । Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Third Part

Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Third Part-3

राजा बासिक का दुत जब राजा पारिक के दरबार में पहुंचा तो सभा मे मौजूद सभी जन काफी प्रसन्न हुए। दुत का जोरों – शोरों से स्वागत किया गया। दुत भी राजा पारिक की स्वागत शैली से काफी प्रभावित था लेकिन इस कार्य कुशलता के बाद उसके जेहन में अब एक डर जन्म लेने लगा था, उस ‘झूठे संदेश’ का डर जो राजा बासिक ने राजा पारीक के लिए भिजवाया था।

आखिरकार अब वह घड़ी आ चुकी थी जब राजा पारिक ने संदेशा पढ़ने का हुक्म दिया। जैसे ही एक पंडित ने संदेशा पढ़कर सुनाया तो राजा पारिक, मंत्री गण व सभा में मौजूद सभी जन चकित रह गए। सभा में एक सन्नाटा सा छा गया। आखिरकार सब सोचने को मजबूर हो गए कि यह ‘कब और कैसे’ हुआ ?

चूंकि दुत राजा बासिक के लोक से था इसीलिए राजा पारिक ने सभा का सन्नाटा तोड़ते हुए कहां, जब तक यह दुत हमारी नगरी में रुकना चाहे रूक सकते है, तब तक इनकी मेहमान नवाजी में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आनी चाहिए और जब भी इनका जाने का मन हो खजान्ची को कहकर इन्हे अच्छी भेंट दें।

दोस्तों, दुत को तो अतिथि गृह में भेज दिया गया किंतु राजा पारिक इतने भी भोले और नासमझ नहीं थे कि वह केवल दुत के हाथों भेजे गए एक संदेश में पर विश्वास कर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएं। उन्होंने तुरंत अपने राज्य के ज्ञानी पंडितों को सभा में एकत्रित होने का हुक्म दिया। पंडितों को जैसे ही राजा का समाचार मिला तो वे सभी अपने-अपने पोथी – पुस्तक उठाकर दरबार में एकत्रित होने लगे…..

जो ज्यादा बुजुर्ग पंडित थे यानी जो चल – फिर नहीं सकते थे, उनके लिए पालकी की व्यवस्था की गई क्योंकि ज्यादा बुजुर्ग पंडित ज्यादा बड़े विद्वान माने जाते थे। वे किसी भी समस्या की जड़ तक पहुंचने में समर्थ होते थे। चूंकि यह मसला काफी गंभीर था इसलिए इसमें सभी की उपस्थिति काफी अहमियत रखती थी।

जब सभी पंडित दरबार में एकत्रित हो गए तो राजा पारिक ने कहां….. नमस्कार पुरोहितों, जैसा कि हम सब जानते हैं, हमारे राज्य को चलाने में आप जैसे विद्वानों की विशेष भूमिका रही है। जब – जब हमारी नगरी में कोई संकट आया है तब – तब आप लोगों ने हर समस्या का समाधान निकाला है और हमें विकट से विकट परिस्थियों से निकाला है। आज एक ऐसा ही संकट हमारी नगरी और हमारे स्वाभिमान पर आन पड़ा है।

पंडित – बताइए महाराज, हम किस प्रकार आपकी सहायता कर सकते हैं ?

तो राजा पारिक ने राजा बासिक के साथ हुई मुलाकात और आज राजा बासिक द्वारा भेजे गए संदेशे का सारा विवरण पंडितों को सुना दिया और बोले, तो आप अपने – अपने पत्तड़े खोल कर इस समस्या का पूरा विवरण मुझे बताइए कि राजा बासिक अपने संदेश के माध्यम से कहां तक सच और कहां तक झूठ बोल रहे हैं।

दोस्तों उन दिनों पंडित ही एक ऐसा जरिया होते थे जो हर बिता हुआ कल व आने वाले कल के बारे में सही-सही बता सकते थे। राजा की सारी कहानी सुनने के बाद सभी पंडित अपनी – अपनी पोथी खोल अपने कार्य में जुट गए। अपने कार्य में जुटे हुए पंडितों को एक दिन बीत गया लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला फिर दूसरा दिन, आखिरकार तीसरे दिन की शाम सारे पंडित अपने – अपने निर्णय पर पहुंच गए।

सभी पुरोहितों ने अपनी – अपनी जानकारी एक बुजुर्ग पंडित को बता कर कहां, आप हम सब में सबसे बड़े हो यदि आप ही पूरी कहानी महाराज को अपने मुख से बताओ तो अच्छा रहेगा। बुजुर्ग पंडित ने सभी पुरोहितों की बात पर सहमति जताई और राजा पारिक से बोले, महाराज राजा बासिक को आप से कोई दुश्मनी नहीं, दुश्मनी है तो सिर्फ इतनी कि उनकी रानी ने एक कन्या को जन्म दिया और आप की रानी ने एक राजकुमार को।

उनका मानना है यदि वह अपनी कन्या आपके राज्य में ब्यातें हैं तो उन्हें लड़की वालों की तरफ से होने के कारण अपना सिर सदैव आपके सामने झुकाना पड़ेगा। इस अपमान से बचने के लिए उन्होंने उस कन्या को भी मरवाने की कोशिश की लेकिन वह कन्या जिंदा है और राजा बासिक की नगरी में ही उसका पालन – पोषण किया जा रहा है। किंतु महाराज, राजा बासिक को इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है।

महाराज एक बात का ध्यान अवश्य रखना, नाग लोक में जाकर अपनी पुत्रवधू को बल द्वारा पृथ्वी लोक पर लाने का निर्णय अपने जहन में कभी मत लाना क्योंकि राजा बासिक नागों के देवता हैं और उनके पास बहुत बलधारी नागों का समूह है, वहां से कोई जिंदा वापस नहीं आ सकता।

राजा पारिक – तो क्या मेरी पुत्रवधू को नाग लोक से पृथ्वी लोक पर लाने का कोई रास्ता नहीं है ?

बुजुर्ग पंडित – महाराज इसका केवल एक ही रास्ता है, जब वह कन्या 18 वर्ष की हो जाएगी तो राजा बासिक को कोढ़ नामक एक रोग निकलेगा ( कोढ़ एक भयंकर रोग होता है जिसमें शरीर धीरे – धीरे गलने लगता है ) । उस रोग को ठीक करने के लिए राजा बासिक को नाग लोक में कहां भी दवा नहीं मिलेगी। वे इस रोग से तभी स्वस्थ हो पाएंगे जब उनकी कन्या निहालदे पृथ्वी लोक पर स्थित भालरा नामक कुएं के पानी से राजा बासिक को स्नान कराएगी।

केवल यही एकमात्र उपाय है जिससे राजा बासिक कोढ़ रोग से निजात पा सकते हैं। इसीलिए महाराज कृपा उस कन्या को 18 वर्ष की होने दें। जब वह भालरा कुआं पर आएगी तो राजकुमार परीक्षित वहां से उसे जबरदस्ती भी ला सकते हैं और दूसरा इसका कोई रास्ता नहीं।

इतनी बात कहकर सभी पंडित अपने स्थान से उठ खड़े हुए और बोले, महाराज अब हमें जाने की इजाजत दें। राजा पारिक ने सभी पंडितों को भारी दक्षिणा देकर विदा किया और आने वाले 18 वर्षों के बारे में सोचने लगे………

तो चलिए दोस्तों यहां की कहानी को थोड़ा विराम देकर राजा बासिक की नगरी की ओर चलते हैं…….. धीरे-धीरे एक वर्ष बित गया फिर पांच वर्ष फिर दस वर्ष और एक दिन ऐसा भी आया जब निहालदे 18 वर्ष की हो गई।

एक दिन राजा बासिक अपने घोड़े पर सवार होकर नगरी के बाजार कि सैहर कर रहे थे तो अचानक रतन सेठ की हवेली की छत पर राजा की नजर जाती है, तो राजा को एक अच्मभीत करने वाला दृश्य दिखाई पड़ता है। उन्होंने देखा आज आसमान से दो सुरज निकले है लेकिन ध्यान से देखने पर राजा को पता लगा की एक नोजवान रूपमति लड़की छत पर अपने केस सुखा रही है। लड़की इतनी सुंदर थी कि मानो उसका रूप सूरज के समान खेल रहा हो।

राजा बासिक उसकी सुंदरता पर इस कदर मोहित हुए कि उन्होंने मन ही मन उससे विवाह करने का निर्णय कर लिया। राजा बासिक इस चीज से बिल्कुल अनजान थे कि जिससे वह विवाह करना चाहते हैं, वह उन्हीं की पुत्री है। दोस्तों, सत्य का जमाना था और उस समय पाप की सजा बहुत भयंकर मिलती थी तो राजा बासिक को उसी समय शरीर में खुजली चलना शुरू हो गई जब उन्होंने अपनी ही पुत्री से विवाह करने का निर्णय लिया और महल पहुंचते-पहुंचते खुजली इतनी तेज हो गई कि राजा पागलों की तरह पूरे शरीर को खुजलाने लगे। यही वह वक्त था जब राजा बासिक कोढ़ नामक रोग की गिरफ्त में आ चुके थे।

अब राजा का शरीर धीरे-धीरे गलने लगा था, रोग ने राजा को चारों तरफ से घेर लिया था। एक से एक नामी वेद – हकीमो को बुलाया गया सभी ने अपनी – अपनी दवाइयां भी दी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर सब विफल होने के बाद राजा ने राज्य के सभी ज्ञानी पंडितों को सभा में एकत्रित होने का हुक्म दिया।

जब सभी पंडित सभा में एकत्रित हो गए तो राजा बासिक ने कहां, पंडितों अपनी – अपनी पोथी खोलिए और अपना दिमाग इस्तेमाल कीजिए और मुझे बताइए कि मैं इस भयंकर बीमारी की गिरफ्त में कैसे आया जो दिन-रात मेरें पूरे शरीर को खाए जा रही है और इसका क्या उपाय है ?

राजा का हाल देखकर पंडित भी काफी चौंक गए। फिर वे अपनी – अपनी पोथी खोलकर बैठ गए। निष्कर्ष पर पहुंचते-पहुंचते उन्हें शाम हो गई, वे सभी समस्या की जड़ तक तो पहुंच गए किंन्तु कोई भी पंडित कुछ बोलता ही नहीं, वे सब राजा के खिलाफ उस सड़यंत्रकारी योजना को बताते हुए काफि डर रहे थे। जो उनकी रानी ने बनाई थी।

काफी वक्त गुजरने के बाद जब किसी भी पुरोहित के मुंह से कोई शब्द नहीं निकला तो राजा बासिक काफि गुस्से में आ गए और बोले, क्या हो गया, क्या तुम्हारी विधा अब विफल हो गई, क्या अब हम तुम्हें राज्य के ज्ञानी पंडितो की उपाधि देना बंद कर दे ?

फिर भी किसी पंडित के मुंह से कोई आवाज न निकली।

फिर राजा बासिक ने कहां, तो ठीक है, आज आप सब अपने – अपने घर जाइए और इस समस्या पर विचार कीजिए यदि कल तक आप लोगों ने मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी तो याद रखना मैं आप सभी को फांसी पर चढ़ा दूंगा। राजा के मुंख से ऐसे कथन सुनने के बाद सभी पंडित डरते – डरते अपने घर चले गए। घर जाकर पंडितों ने चौपाल में एक सभा आयोजित की और उनमें से एक ने कहां, देखो भाइयों यदि हम राजा को सही बताएंगे तो भी मारे जाएंगे और नहीं बताएंगे तो भी मारे जाएंगे। आखिर हम करें तो क्या करें ?

फिर सभी पंडित एक बुजुर्ग पुरोहित के चरणों में गिर कहने लगे, दादा आप हम सभी से विद्वान हैं और बुजुर्ग भी कृपा आप ही कोई हल निकाले। अपने सामने इतने सारे भयभीत चेहरों को देखते हुए बुजुर्ग पंडित ने कहां, तो ठीक है कल मैं बताऊंगा राजा को सारा सत्य। यदि राजा को दंड देना होगा तो मुझे दे देंगे वैसे भी मेरी तो अब उम्र हो गई। तुम सब कल दरबार में मेरे पीछे बैठ जाना और सारा काम मुझ पर छोड़ दो………….

दोस्तों भाग-4 में आप पढ़ेंगे जब राजा बासिक को सत्य का पता लगेगा तो क्या प्रतिक्रियां होगी उनकी ? आखिर क्या सजा देंगे राजा रानी को इस सड़यंत्र की ? या फिर राजा अपना लेंगे अपनी राजकुमारी निहालदे को ? लेकिन इन सब के बाद आखिर वो कौन-सा कदम था जो राजा पारिक राजा बासिक के उस झूठे संदेशे पर उठाने वाले थे ? जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लोग वर्तमान सोच (wartmaansoch.com) के साथ। अगले भाग कि Notifications पाने के लिए हमें Subscribe जरूर करें।

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नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-1

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-2

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-4

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