नागराज वासुकी और परिक्षित

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-6 । Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Sixth Part

Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Sixth Part-6

अब राजकुमारी निहालदे राजकुमार परीक्षित से वापस लौटने का वादा कर नाग लोक की ओर चल दी। चलते-चलते राजकुमारी को एहसास हुआ कि वह राजकुमार से वादा कर बुरी तरह फस चुकी है उसे मालूम था कि उसके पिता नाग लोक के राजा बासिक अपनी पुत्री को पृथ्वी लोक पर कभी नहीं ब्यायेंगे किंतु राजकुमारी अपने पिता की तरह वादाखिलाफी भी नहीं करना चाहती थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए राजकुमारी के मन में एक योजना ने जन्म लिया एक ऐसी योजना जिसने राजकुमारी के उदास चेहरे पर खुशी की चमक ला दी थी।

इसी योजना के साथ राजकुमारी अब नाग लोक पहुंच गई। अपनी पुत्री को आता देख राजा बासिक व रानी काफी प्रसन्न हुए और अपनी पुत्री के बहादुरी का गुणगान गाने लगे जो पृथ्वी लोक के झालरा कुएं से अकेली पानी भर लाई थी।

थोड़ी देर बाद राजा बासिक खुले चौक में एक पटड़ा डाल उस पर बैठ गए और बोले, पुत्री अब जल्द से जल्द हमें इस पवित्र जल से नहला दो ताकि हम जल्दी स्वस्थ हो सके और इस रोग से छुटकारा पा सके।

दोस्तों अब वक्त आ चुका था जब राजकुमारी को अपनी योजना आगे बढ़ाने थी……. अपनी योजना के अनुसार राजकुमारी ने अपने हाथ का अंगूठा राजा बासिक के माथे पर रख कर सारा पानी सिर पर डाल दिया और मटकी को जानबूझकर फोड़ दिया।

अब पानी राजा बासिक के पूरे शरीर पर पहुंच गया लेकिन माथे पर अंगूठे के नीचे नहीं पहुंच पाया यानि बाकि शरीर स्वस्थ हो गया किंतु राजकुमारी के अंगूठे के कारण माथे का हिस्सा वैसा ही रह गया। चूंकी राजा बासिक को इसकी भनक नहीं थी तो वह स्नान करके काफी प्रसन्न हुए लेकिन जब उन्होंने आईना मंगवाया कर अपना चेहरा देखा तब उनकी नजर उस निशान की ओर गई जो उनके चेहरे पर काफी भद्दा दिख रहा था।

चूंकी निहालदे ने वह निशान जानबूझकर बचाया था क्योंकि राजकुमारी की योजना यही थी ताकि राजा बासिक उन्हें दोबारा पानी लाने के लिए पृथ्वी लोक भेज सकें।

राजा बासिक (आईना देखते हुए) – पुत्री आपने यह भुल किस प्रकार कर दी, यदि यह निशान हमारे शरीर के किसी अन्य भाग पर होता तो इतनी बड़ी दुविधा ना होती किंतु यह हमारे चेहरे पर है जो काफी भद्दा दिखाई दे रहा है। हमें आपको खेद से कहना पड़ रहा है की आपको एक बार फिर झालरा कुआं जाना होगा ताकि हमारा चेहरा भी ठीक हो सके।

निहालदे – क्षमा करें पिताजी जो हम आपको अच्छी तरह स्नान ना करा सके किंतु आप चिंता ना करें हम दोबारा जरूर जाएंगे।

निहालदे का मन प्रसंता से व्याकुल हो उठा क्योंकि अब उसकी योजना सफल हो चुकी थी। मन ही मन निहालदे ने भगवान का शुक्रिया किया, अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया और मटकी उठाकर पृथ्वीलोक की ओर चल दी। अबकि बार वह सदा के लिए जा रही थी इसलिए आंखों में आंसू भी थे और चेहरे पर खुशी की थी यानी कुछ गम तो कुछ खुशी। अब निहालदे तो चली गई किंतु राजा बासिक के चहरे पर वह निशान सदा के लिए रह गया।

(दोस्तों राजा बासिक के चेहरे का वह निशान आज भी काले नाग के माथे पर है। यदि आप कभी काला सांप देखते हैं तो ध्यान से देखने पर आपको यह निशान सांप के माथे पर दिख जाएगा जिसे हम गाय का खोज मानते हैं क्योंकि वह निशान गाय के पदचिन्ह जैसा ही लगता है।)

जैसे ही राजकुमारी निहालदे झालरा कुआं पर पहुंची तो देखती है कि राजकुमार परीक्षित पहले से ही वहां बैठकर राजकुमारी का इंतजार कर रहे थे। राजकुमार परीक्षित ने जैसी ही निहालदे को देखा तो उनका मन प्रसंता से व्याकुल हो उठा और एक खुशी की लहर पूरे शरीर में दौड़ पड़ी। दोनों ने दौड़ कर एक दूसरे को गले से लगा लिया।

निहालदे (आखों मे आंसू लाते हुए) – राजकुमार मैं आपके लिए अपना सब कुछ छोड़ आई हूं, अब आप मुझे जहां लेकर चलेंगे मैं आपके साथ वही चलने के लिए तैयार हूं।

राजकुमार परीक्षित निहालदे को लेकर अपने महल में आ गए। जहां खूब जोरों – शोरों से उनका स्वागत किया गया। राजा पारिक भी अपनी पुत्रवधू को देखकर काफी प्रसन्न हुए। पृथ्वी लोक का हर प्राणी काफी प्रसन्नता था मानो उन्होंने नाग लोग से राजकुमारी छीन ली हो।

वहां दूसरी तरफ राजा बासिक को इंतजार करते हुए सारा दिन बित गई, धीरे-धीरे रात होने लगी अब राजा को एक गहरी चिंता सताने लगी थी… आखिर क्या हुआ होगा हमारी पुत्री के साथ ? एक अनजान भय से राजा कांप पर रहे थे। यही हाल रानी का भी था वह भी इसी चिंता में डूबे जा रही थी कि… हमारी पुत्री आखिर अभी तक क्यों नहीं लौटी ? परिणाम यह हुआ की राजा व रानी ने सारी रात करवटें बदल – बदल कर बिताई।

सुबह होते ही राजा ने अपने सभी दुतो को दरबार में तुरंत एकत्रित होने का आदेश दिया और उन्हें झालरा कुआं जाकर राजकुमारी के साथ घटित घटना का पता लगाने का आदेश दिया। सभा समाप्त होने के बाद सर्वश्रेष्ठ दूतों को झालरा कुआं भेज दिया गया। जब दुत झालरा कुआं पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मटकी तो वहां फूटी पड़ी थी और घोड़े के पैरों के निशान कुएं के चारों तरफ बने हुए थे। इतने सारे निशानों को देखकर दुतों ने अनुमान लगा लिया की हो ना हो यह घोड़े वाला ही अवश्य राजकुमारी को ले गया है।

जब दुत घोड़े के पद चिन्हों का पीछा करते-करते राजा पारिक की नगरी में पहुंचे तो उन्हें समझते देर न लगी कि हो ना हो अवश्य राजकुमार परीक्षित ही राजकुमारी का अपहरण करके लाया हैं। घटना का पूरा विवरण लेने के बाद दुत तुरंत नाग लोक की ओर चल दिए।

नागलोक में राजा बासिक दुतों का बड़ी ही बेसबरी से इंतजार कर रहे थे, जैसे ही राजा ने दुतों को देखा तो लपक कर उनके पास आकर कहने लगे जल्दी बताओ क्या समाचार लेकर आए हो ?

जब दुतों ने राजा बासिक को घटना का पूरा विवरण सुनाया तो यह सुनकर राजा को चक्कर आने लगे और बोले, ‘आखिर वही हुआ जिसका हमें डर था’।

राजा बासिक – हमारी राजकुमारी को राजकुमार परीक्षित ले गया है किंतु हम चुपचाप नहीं बैठेगें। हम अपने विष से राजा पारिक की नगरी को समाप्त कर देंगे। हम अपने सांपों का एक ऐसा जखीरा पृथ्वी लोक पर भेजेंगे जिससे राजा पारिक की रूह कांप जाएगी और उसे हमारे कदमों में गिरने पर मजबूर कर देगी।

राजा बासिक ने नाग लोक के सभी शक्तिशाली नाग योंधाओ को तुरंत दरबार में हाजिर होने का हुकुम दिया। महाराज का हुकुम सुनते ही सभी नाग योंधा दरबार में एकत्रित हो गए। राजा बासिक ने सात पान का बीड़ा सभा के बीच में डाल दिया और बोले, ‘जो भी योद्धा हमारे दुश्मन को परास्त कर हमारी राजकुमारी को सुरक्षित हमारे पास ले आएगा वह इस सात पान के बिड़े को खाए’।

लेकिन सात पान के बिड़े को खाने की किसी नाग योधा की हिम्मत नहीं हो रही थी। आखिर बिड़े का पान कुम्हलाने लगे थे। योद्धाओं का यह हाल देखकर राजा बासिक आग बबूला हो गए और बोले, आखिर भूरिया तुझे क्या हुआ है, क्या तेरी भूजाओं में वह पहले जैसा बल नहीं रहा, क्या तेरे शरीर से सारा विष सूख चुका है, क्या तू भुल गया कि तुने बड़े से बड़े योद्धाओं को परास्त किया है ?

चूंकि भूरिया नाग समग्र नागों में सबसे शक्तिशाली था और नाग योद्धाओं में सबसे बड़ा नाम भूरिया का ही था इसलिए अपने बारे में ऐसी जली – कटी बात सुनकर भूरिया को गुस्सा आ गया और वह क्रोध में खड़े होकर पान का बिड़ा चबा गया और बोला, महाराज आप चिंता ना करें मैं राजा पारिक के पूरे खानदान को ही यमलोक पहुंचा दूंगा और राजकुमारी को सही – सलामत वापस लेकर आऊंगा।

यह कहकर भूरिया नाग राजा बासिक को परिणाम करके पृथ्वीलोक की ओर चल दिया……..

दोस्तों भाग-7 में आप पढ़ेंगे की क्या भूरिया नाग राजा पारिक के सारे खानदान को मिटाने में सफल हो पाएगा, क्या वह निहालदे को पृथ्वी लोक से लाने में सफल हो पाएगा ? आखिर क्या होगा जब भूरिया को पता लगेगा कि निहालदे को जबरदस्ती नहीं बल्कि वह स्वमं अपना मर्जी से राजकुमार परीक्षित के साथ आई है ? जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लोग वर्तमान सोच (wartmaansoch.com) के साथ। अगले भाग कि Notifications पाने के लिए हमें Subscribe जरूर करें।

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नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-1

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-2

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नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-4 

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