Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Eighth Part.

नाग लोक के राजा वासुकी और राजा परीक्षित की कहानी भाग-8 । Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Eighth Part

Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Eighth Part-8

अब राजकुमार परीक्षित व निहालदे को कंचन महल में भेज दिया गया था चूंकि वहां वे दोनो सुरक्षित थे इसीलिए वे वहां शांति से रहने लगे। इधर धन्तर वैद ने भी महाराज से आज्ञया ली और अपने आश्रम की ओर चल दिए।

उधर नाग लोक में राजा बासिक ने फिर एक पान का बीड़ा सभा के बीच में फेंक दिया और बोले, ‘जो भी नाग योद्धा धन्तर वैद का अंत कर सकता हैं, वह इस पान के बिड़े को चबाए। सभी नाग योध्दा एक – दूसरे की शक्ल ताकने लगे क्योंकि किसी भी नाग योद्धा में वैदराज धन्तर का सामना करने की हिम्मत नहीं थी। वे सभी धन्तर वैद को अच्छी तरह जान चुके थे। धन्तर वैद में केवल अपने मंत्रों द्वारा उन्हें भस्म करने की शक्तियां विराजमान थी, जिससे सभी नाग योध्दा भयभीत थे।’

आखिर बिड़े के पान दुबारा कुम्हलाने लगे तो राजा बासिक अबकी बार तक्षक नाग से मुखाबीत होकर बोला, ‘तक्षक नाग भूरिया तो अपने कार्य में सफल होकर भी असफल रहा किंतु क्या तेरे अंदर भी विष सूख चुका है, क्या अब तुझे भी मौत का भय सताने लगा है ? यदि ऐसा ही है तो जा ले – ले शरण उन पृथ्वी वासियों की और छुप जा उनके दामन में।’

तक्षक नाग अपने बारे में ऐसी कड़वी बातें सुनकर काफी क्रोधित हुआ। वह फुंकारता हुआ खड़ा हुआ और बोला, ‘महाराज मेरे बारे में ऐसी वाणी बोलते हुए कुछ तो विचार किया होता, भला ऐसा कौन सा कार्य है जो मैंने आपके लिए पुर्ण न किया हो। आपने मुझे आज तक जो भी कार्य दिया मैं उसमें हमेशा विजयी होकर लौटा हूं। मैंने आपको कभी निराश नहीं किया और आज भी मैं आपको निराश नहीं करूंगा, आप चिंता ना करें मैं पृथ्वी लोग जाकर धन्तर वैद का अंत करके ही वापस लौटूंगा।’

Naag Lok Ke Raja Basik Ki Kahani Eighth Part. Takshak Naag.

फिर तक्षक नाग राजा बासिक से आज्ञा लेकर पृथ्वीलोक की ओर चल दिया। पृथ्वीलोक पहुंचकर तक्षक नाग ने एक ब्राह्मण का भेष बनाया और वैद राज धन्तर के आश्रम में पहुंच गया। वहां जाकर उसने देखा कि आश्रम में तो कोई है ही नहीं। आखिर तक्षक नाग वही छुपकर धन्तर वैद के लौटने का इंतजार करने लगा किंतु काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई ना लौटा तो तक्षक को क्रोध आने लगा। वह धन्तर वैद को ढूंढने की रणनीति बनाने लगा तभी उसकी नजर एक झोपड़ी की तरफ पड़ी जो आश्रम से कुछ ही दूरी पर स्तिथ थी।

तक्षक नाग तुरंत दौड़ कर उस झोपड़े के पास पहुंचा, जिसमें एक गरीब किसान का परिवार रहता था। वहां जाकर तक्षक बोला, ‘कोई है जो इस बूढ़े ब्राहमण को पानी पिला सके।’

आवाज सुनकर किसान अपनी झोपड़ी से बाहर निकला और बोला, ‘कृपा बैठिए महाराज मैं अभी आपके लिए जल लेकर आता हूं।’

पानी पीकर तक्षक किसान से बोला, ‘मेरे पुत्र को एक जहरीले सांप ने ढस लिया है, जिससे उसका शरीर धीरे-धीरे नीला पड़ता जा रहा है इसीलिए मैं धन्तर वैद को बुलाने उनके आश्रम गया था किंतु मुझे वहां कोई नहीं मिला। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि धन्तर वैद मुझे कहां मिल सकते हैं ?’

किसान – ‘पंडित जी धन्तर वैद तो राजा पारिक की नगरी में गए हैं। पता चला है कि राजा पारिक और उनके पूरे परिवार को एक जहरीले सांप ने ढस कर मृत्यु के घाट उतारने कि कोशिश की है। किंतु अब वे सभी स्वस्थ हैं, वैदराज धन्तर ने उन सभी के प्राण बचा लिए। क्योंकि आपका भी वैध जी से मिलना जरूरी है तो क्यों ना आप भी राजा पारिक की नगरी ही चले जाए।’

तक्षक नाग किसान का धन्यवाद करते हुए राजा पारिक की नगरी की ओर चल दिया। दो – चार मील चलने के बाद उसने विचार किया कि राजा पारिक की नगरी में जाने से आखिर मुझे क्या फायदा होगा ? वहां तो सभी नाग लोक के दुश्मन है, अगर किसी को जरा भी भनक लग गई तो कुछ भी हो सकता है। क्यों ना मैं यहीं छुपकर धन्तर वैद के आने का इंतजार करूं ?

और तक्षक नाग वही रास्ते में अपना डेरा जमा कर बैठ गया और धन्तर वैद के आने का इंतजार करने लगा……

दोस्तों भाग-9 में आप पढ़ेंगे कि क्या तक्षक नाग वैद राज धन्तर को खत्म कर पाएगा, जिनके देखने मात्र से खतरनाक से खतरनाक नाग का विष उतर राजा है ? आखिर हां तो ऐसी कौन-सी रणनीति अपनाएगा तक्षक नाग और यदि नहीं तो क्या हैशर करेंगे वैद राज धन्तर नाग तक्षक का ? जानने के लिए बने रहे हमारे ब्लोग वर्तमान सोच (wartmaansoch.com) के साथ। अगले भाग कि Notifications पाने के लिए हमें Subscribe जरूर करें।

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