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चतुर चमार की कहानी । Chatur Chamar Best Story In Hindi

Chatur Chamar Best Story In Hindi- इस कहानी में आप पढ़ेंगे की जब एक गरीब चमार ( मोची) अपने गांव में काम-धंधा न होने के कारण, शहर की तरफ रुख करता है तो वह किन-किन विपतियों का सामना करता है और असफलता पर सफलता प्राप्त करता है।

चतुर चमार की कहानी। Chatur Chamar Best Story In Hindi

एक गांव में एक गरीब चमार अपनी पत्नी के साथ रहता था। गांव में काम-धंधा न होने के कारण वह शहर जाकर काम करने की सोचता है। कुछ दिनों बाद ही वह शहर चला जाता है। अपना काम शुरू करने के लिए उसके पास शहर में कोई ठिकाना नहीं था, तो वह सड़क पर खड़ा होकर ही जोर-जोर से आवाज लगाता है “कोई जूते ठीक करवा लो” लेकिन उस दिन उसे कोई ग्राहक नहीं मिलता।

दूसरे दिन वह फिर जाता है किंतु आज उसे एक महिला बुलाती है और अपना जूता सुधारने के लिए देती है। थोड़ी दूर जाकर एक ओर महिला उसे बुलाती है। ऐसे करके कुछ दिनों में ही उसका काम रफ्तार पकड़ने लगा।

एक महीने में उसने चार सोने के सिक्के कमाए। उनमें से दो सिक्को का उसने एक गधा खरीदा। जब वह गधा खरीद कर वापस आ रहा था तो जंगल में उसने देखा चार डाकू धीरे धीरे उसकी ओर बड़ रहे थे। डाकुओं से बचने के लिए उसके दिमाग में एक रणनीति बनने लगी थी। डाकुओं को देख चमार ने पहले ही गधे की गर्दन पर एक सोने का सिक्का बांध दिया। डाकू उसके पास पहुंचे और बोले “तेरे पास जो भी निकाल दे वरना परिणाम अच्छा नहीं होगा”।

चमार घबराकर कहता है “मैं एक साधारण मजदूर हूं भला मेरे पास तुम्हे क्या मिलेगा”। इतने में ही गधे की गर्दन से सिक्का जमीन पर गिर जाता है। सिक्के को देखते ही डाकू ओर गुस्सा हो गए और बोले “ये हमे मूर्ख समझता है इसके पास सोने के सिक्के है”।

चमार अपने दिमाग का इस्तेमाल कर कहता है “यह कोई साधारण गधा नहीं है अपितु एक मायाबी गधा है। इसको जितना खिलाओगे यह उतने ही सोने के सिक्के देता है”।

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यह बात सुनते ही डाकुओं के चहरों पर मुस्कान आ गई। उन्होंने गधा खरीदने की सलाह जचाई और चमार को पच्चास सोने के सिक्के देने को तैयार हो गए। उसने थोड़ा आना-कानी करने का बहाना किया और फिर गधा उन्हे बेच दिया (क्यों न बेचता आखिरकार दो सिक्को का गधा पच्चास सिक्को में बिक रहा था)।

डाकू गधा लेकर अपने घर चले गए उस दिन गधे ने कोई सोने का सिक्का नहीं दिया तो उन्होंने सोचा शायद आज अपने मालिक से बिछड़ने के चकर में उदास है। लेकिन जब दो तीन दिन भी उसने कोई सिक्का नहीं दिया तो वे समझ गए यह कोई मायाबी नहीं अपितु एक साधारण गधा है।

सभी डाकू गुस्से से आग बबूला हो गए उन्होंने चमार को सबक सिखाने का निर्णय किया। जब वे चमार के घर पहुंचे तो देखा उसने मुर्गा फार्म खोल लिया था । उसे देखकर वे और गुस्सा हो गए।

उन्होंने चमार को पकड़ा और एक बौरी में बांध दिया और थोड़ी दूर चलने के बाद एक ने कहां सरदार हम इसे गंदे नाले में फेंक देते है। यह बात सुनकर चमार भयभीत हो गया। काफी देर चलने के बाद सभी डाकू थक गए धूप तेज थी तो उन्हे पास में एक चर्च दिखा। वे चर्च में आराम करने चले गए और बौरी वहीं रख दी।

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थोड़ी देर बाद चमार ने सुअरों की आवाज सुनी। आवाज सुनकर वह समझ गया की सुअरों के साथ कोई आदमी भी जरूर होगा। उसने बौरी के अंदर से ही आवाज लगाई। सुअरों का मालिक चारों तरफ देखकर कहता है “कौन है भाई और कहा है”?

चमार- मै इस बौरी में कैद हूं।

आदमी- तुम्हे बौरी में क्यों कैद कर रखा है?

चमार फिर दिमाग लगाकर कहता है कुछ लोग मेरी शादी जबरदस्ती एक राजकुमारी से कराना चाहते है। ये मुझे बौरी में बांध कर राजकुमारी के पास ही ले जा रहे है।

वह आदमी कहता है “भाई ये तो कोई पागल ही होगा जो राजकुमारी से शादी करने से इंकार करे”।

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चमार- तो एक काम करों मेरी जगह इस बौरी में तुम कैद हो जाओ और राजकुमारी से शादी कर लेना। वह आदमी राजकुमारी से शादी करने की बात पर इतना खुश हुआ की खुद को चमार की जगह बौरी में कैद कर लेता है। थोड़ी देर बाद डाकू आते है और बौरी उठा कर थोड़ी ही दूर एक नाले में फेंक देते है।

जब डाकू वापस अपने घर जा रहे थे तो उन्होंने देखा चमार चार-पांच सुआरों के साथ वहां से आ रहा था। उनको यकीन नहीं हुआ की “यह वापस कैसे आ गया? इसे तो अभी हम नाले में फेंक कर आए थे। डाकू उससे पूछते है “तुम वापस कैसे आए”?

चमार ने उन्हें सबक सिखाने के लिए एक रणनीति बना रखी थी।

चमार ने बताया “तुम ने तो मुझे नाले में फेंक दिया लेकिन वह कोई ऐसा-वैसा नाला नहीं था। उसके अंदर अदभुत खजाना और बहुत से प्यारे सुअर थे। जिन्होंने मुझे बचाया और बहुत सारा खजाना भी दिया।

डाकुओं को उसकी बात पर विश्वास होने लगा था तब उन्होंने भी नाले में जाने का निर्णय किया। किंतु चमार ने कहा “ऐसे नहीं तुम्हे भी नाले में उसी प्रकार फेंकना होगा जिस प्रकार तुमने मुझे फेंका था, यानी तुम्हे बौरी में बांधना होगा”। वे सभी तैयार हो गए। चमार ने उन सब को बांध दिया और नाले में जाकर धक्का दे दिया।

शिक्षा :- तभी कहते है बुद्धि के आगे बल काम नहीं आता अर्थात ज्ञानी आदमी का सामना केवल ज्ञान द्वारा ही किया जा सकता है अपने बल द्वारा नहीं।

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