Lakadhara bna Raja bhoj (infographics)

लकड़हारे से राजा भोज बनने की कहानी। Best Hindi Story With Moral

एक मामूली लकड़हारे से राजा भोज बनने की कहानी एक ऐसी कहानी है जिसे पढ़ने के बाद आप ये सोचने पर मजबुर हो जाएंगे की क्या सच में ईश्वर हमारे मानव जीवन में हमारी परीक्षा लेने आते है। यदि आते है तो उसका फल हमें क्या मिलता राजा भोज की जिंदगी या मृतू। सायाद ये तो हमारे कर्मो पर निर्भर करता है।
एक बार जरूर पढ़िए दिल को छू जाने वाली कहानी।

Best Hindi Story With Moral

एक गांव में महेश अपने परिवार के साथ रहता था जो बहुत ही गरीब हालत से गुजर रहा था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और माता-पिता थे। महेश और उसके पिता जंगल से लकड़ियां काट कर गुजर-बसर करते थे। वे लकड़ियों को बाज़ार में बेचते जिसके बदले दुकानदार उन्हें गुड़-चना देता यही खाकर वे गुजारा करते थे।

महेश की मां लालची स्वभाव की थी। वह रोज गुड़-चना खाकर गुजारा करने वालो में से नहीं थी। तो उसने गुस्से में एक ही बात बोली कि 25 साल हो गए शादी को आज तक खीर – हलवा नहीं खाने को मिला, तो यह कैसा घर।

मां की बात सुनकर महेश सोचने लगा कि मां ने आज तक खीर-हलवा नहीं खाया अगर मै उसको खीर-हलवा न खिला पाया तो मै कैसा बेटा।

वह अगले दिन सुबह जल्दी ही खड़ा होकर जंगल लकड़ियां काटने चला जाता है। उस दिन वह ज्यादा लकड़ियां काटता है, जिससे वह गुड़-चने की जगह दुकानदार से पैसे मांगता है। दुकानदार उसे पांच रू देता है।

उन पैसों से वह खीर-हलवे का सामान खरीदता है और अपनी मां से खीर-हलवा बनाने के लिए कहता है। सामान देखकर उसकी मां बहुत खुश होती है और बनाने की तैयारी करने लगती है। जैसे ही खीर-हलवा बनकर तैयार होता है महेश कि मां उसे चार थालियों में डाल देती है।

लेकिन अचानक उनके घर एक ब्रह्मण प्रकट होते है और भिक्षा की मांग करते है। उनके पास ब्रह्मण को देने की लिए कुछ नहीं था  तो महेश अपनी थाली भिक्षा समझकर ब्रह्मण को दे देता है।

Best Hindi Story With Moral - Pandit घर एक ब्रह्मण प्रकट होते है।
Hindi Story With Moral For Kids

 ब्रह्मण अत्यधिक प्रसन्न होते है। किन्तु उसे खाने के बाद भी उनका पेट नहीं भरता तो महेश के पिता भी अपनी थाली उन्हें दे देते है और बाद में उसकी पत्नी भी अपनी  थाली ब्रह्मण को दे देती है। महेश की मां यह सब कुछ देख रही थी ब्रह्मण को देने के डर से वह जल्दी-जल्दी खीर-हलवा खा जाती है। ब्रह्मण वहा से चले जाते है और थोड़े ही दिनों में महेश और उसका परिवार धीरे-धीरे मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

महात्मा बुद्ध के दो वरदान

भगवान एक थाली का फल उन्हें अगले जन्म में देते है। उन सब का दूसरा जन्म होता है। महेश अगले जन्म में राजा भोज बनकर जन्म लेता है। उसके पिता सबसे बड़े ज्ञानी पंडित और उसकी पत्नी उस ज्ञानी पंडित की बेटी जो खगोलशास्त्र में निपुण थी। लेकिन अभी तक उसकी मां का कोई पता नहीं था।

अपने असो-आराम को देख राजा भोज एक दिन दुविधा में फैंस जाते है कि मैंने पिछले जन्म में ऐसा क्या पुण्य किया था जिसकी बदौलत ईश्वर ने मुझे राजा भोज बनाया। राजा अपने आस-पास के सभी ज्ञानी पंडितो-ब्रह्मण को महल बुलवाता है और उनसे यही सवाल करता है कि मैंने पिछले जन्म में ऐसा क्या पुण्य किया था जिसकी बदौलत ईश्वर ने मुझे राजा भोज बनाया। सभी पंडित-ब्रह्मण राजा के नग सास्त्र व जन्म कुंडली देखने का प्रयास करते है लेकिन सभी असफल हो जाते है।

कोई राजा को बताता है कि दूर एक गांव में बहुत बड़े ज्ञानी पंडित रहते है केवल वही आपको पिछले जन्म के बारे में बता सकते है। राजा भोज यह बात सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हो जाते है। उस पंडित को बुलाने के लिए राजा भव्य समारोह का आदेश देते है, महल से उसके गांव तक लाल कालीन बिछाई जाती है, बैंड-बाजो के साथ पंडित का स्वागत किया जाता है।

जब वह पंडित महल पहुंचता है तो ना राजा को और न ही उस पंडित को ये पता था कि हम दोनों पिछले जन्म में बाप-बेटे थे। पंडित सभी उपदेसो में ज्ञानी था लेकिन उसे नहीं पता था कि राजा पिछले जन्म से सम्बन्धित सवाल करेंगे और ना ही वह पंडित पिछले जन्म के बारे में कुछ जानता था।

राजा वहीं सवाल पूछता है पंडित में राजा को मना करने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि राजा को इसके और इसके ज्ञान के बारे में बहुत कुछ बताया गया था। तो पंडित ने राजा के सभी सवालों के जवाब देने के लिए एक महीने का समय मांगा। राजा इतने प्रसन्न हुए की उन्होंने पंडित के घर एक महीने के लिए महल का राशन भिजवाया।

चार ब्रह्मणो की कहानी

दिन बीतते गए पंडित घबराट के मारे सुकने लगा कि एक महीना होने पर क्या जवाब दूंगा। अपने पिता की हालत देख उसकी बेटी पूछने लगी ( जो पिछले जन्म में राजा भोज की पत्नी थी) पिता जी कुछ दिनों से आप मुझे परेशान दिख रहे है, क्या बात है मुझे बताइए?

पिता (पंडित) उसे सारी बात बताते है। बेटी ने गोर से सारी बात सुनी (जो खगोशास्त्रीय में निपुण थी) कहती है पिताजी आप परेशान न हो अगली बार जब महल जाना हो तो मुझे लेकर चलना मै दूंगी राजा के सभी सवालों का जवाब।

एक महीना पूरा हो जाता है पंडित को महल बुलाया जाता है। राजा के पूछने पर वह बोलता है महाराज ये बात तो इतनी छोटी है कि इसका जवाब मेरी बेटी भी दे सकती है।

Hindi Story With Moral For Kids पंडित, बेटी और राजा

उसकी बेटी सामने आती है वह काफी खूबसूरत थी, कन्या राजा के दोनों हाथ पकड़ती है और उन्हें स्वर्ग की यात्रा पर के जाती है।

वहा का दृश्य देख कर राजा अच्मभित हो जाता है। ईश्वर ने वहा बहुत ही सुन्दर महल बनवाया था जहा चारों ओर सुख ही सुख थे। राजा उसकी विदया देखकर हैरान रह जाते है। राजा समझ चुके थे कि उनके सभी सवालों का जवाब केवल वही दे सकती है। राजा मन ही मन उससे विवहा करने की सोचने लगे। थोड़ी ही देर में राजा भोज देखते है स्वर्ग का सुन्दर महल अचानक टूटने लगता है। कन्या समझ चूकी की राजा के मन की बात ईश्वर को मंजूर नहीं।

वह राजा को वापस नीचे ले आती है। राजा स्वर्ग के महल के बारे में कन्या से पूछते है तो वह कहती है राजा वह महल ईश्वर ने स्वर्ग में आप के लिए बनाया था, किन्तु आप के मन में जब मुझसे विवाह करने की बात आई तो वह महल टूटने लगा जो ईश्वर को मंजूर नहीं है।

राजा उसकी बात सुनकर हैरान हो जाते है और ईश्वर का इशारा समझ जाते है।  वह खुद उसका विवाह एक राजकुमार से कराते है और एक भाई बनकर उसे विदा करते है। राजा उसको विदा करने के लिए जब डोली में बिठाने जाते है तो वहा भिखारियों की कतार थी जिसमे महिलाएं व आदमी दोनों थे।

Hindi Story With Moral For Kids डोली में पंडित की बेटी

तब पंडित की बेटी राजा को उसके पिछले जन्म की कहानी बताती है। की आप और मेरे पिता पिछले जन्म में बाप-बेटे थे और मै आपकी पत्नी थी। आप दोनों जंगल से लकड़ियां काट कर अपना और हमारा पेट भरते थे।

एक दिन हमारे घर खीर-हलवा बना था जो एक ब्रह्मण खाने आया था जो कोई ओर नहीं स्वं कृष्ण भगवान थे हम सब ने अपनी थाली उस ब्रह्मण को भिक्षा समझकर दे दी लेकिन आप की मां ने अपनी भूख मिटानी चाही। जिसका फल ईश्वर ने हमें इस जन्म में दिया है।

राजा उससे मां के बारे में पूछता है क्या मां का दूसरा जन्म हुआ? तो वह बताती है राजा ये जो भिखारियों कि कतार है ना यही आपकी मां कटोरा लेकर खड़ी है।

राजा भोज पंडित की बेटी से विवाह करना चाहते थे किन्तु ये बात ईश्वर को पसंद ना आई वे दोनों पिछले जन्म में भले ही पति पत्नी थे किन्तु इस जन्म में वह कन्या महेश के पिता की बेटी थी। जो ईश्वर की दृष्टि से भाई बहन थे।

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