कहानीयां

बिरबल को “पाद” मारने की सजा । Best 3 Akbar Birbal Stories In Hindi

अकबर बीरबल की अनसुनी कहानीयां:- आप ने अकबर बीरबल की कहानियां तो खूब सुनी या पढ़ी होगी। लेकिन हम जो आपके लिए कहानियां लाए हैं। वे शायद ही आपने कभी पढ़ी या सुनी हो। ये कहानियां हमने गांव-कस्बों के बुजुर्ग लोगों से एकत्रित की है, जो बहुत ही कम लोगों की पहुंच में है। ये कहानियां हमें मनोरंजन के साथ कुछ सिखाकर भी जाती है इन कहानियों को एक बार जरूर पढ़े।

जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर मुगलों में सबसे महान, मुलायम दिल एवम् एक शक्तिशाली शासक थे लेकिन इसके बावजूद भी बादशाह अकबर की सभा परेशानियों का घर थी। जिसका निवारण करने में केवल उनके सबसे प्रिय नवरत्न में से एक रत्न बीरबल ही सक्षम थे। बीरबल स्वभाव से बुद्धिशाली, और किसी भी समस्या का समाधान ढूँढने में निपुण थे।

Best 3 Akbar Birbal Stories In Hindi

 राजा अकबर के राज सिंहासन पर हंगने की मांग

एक दिन की बात है बादशाह अकबर की सभा में नाच-गाना चल रहा था। बादशाह अकबर नाचने वाली महिला के नाच से इतना प्रसन्न हुए की महिला को अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी मांगने को कहां। यानी महिला राजा की धन-दौलत, महल आदि में से कुछ भी मांग सकती थी।

नाचने वाली महिला ने कहां, राजा आपने बोला है, कि जो भी मांगुगी वहीं मिलेगा। आप अपनी बात से मुकर तो नहीं जाओगे? राजा ने सोचा यह धन-दौलत, जमीन-जायदाद में से ही कुछ मांगेगी। राजा ने महिला की मांग पूरी करने के लिए वचन से दिया।

जब महिला ने अपनी मांग राजा के सामने रखी तो राजा अकबर के साथ सभा में मौजूद सभी की आंखें चार हो गई। नाचने वाली महिला ने राजा अकबर के राज – सिंहासन पर कल सुबह हंगने (गु) की मांग रखी।

Best 3 Akbar Birbal Stories In Hindi

राजा हैरान होकर महिला को देखते है, किन्तु राजा वचनबद्ध थे, तो दिल पर पत्थर रख कर हां कर दिया। राजा पूरी रात सो नहीं पाए। राजा ने आधी रात में ही बीरबल को बुलाने का आदेश दिया।

बीरबल वहां पहुंचते हैं, और राजा को हैरान देख उनकी समस्या पूछते है। राजा ने बीरबल को सारी बात बताई राजा की बात सुनकर बीरबल बोलते है बस महाराज इतनी सी बात और इस छोटी सी बात पर आप इतने परेशान है।

राजा थोड़े गुस्से में, बीरबल आपको यह छोटी सी बात लगती है। बीरबल बोलते है- हे राजा आप परेशान ना हो अब आप सो जाइए। कल वहीं होगा जो नहीं होना चाहिए। अगले दिन सभा फिर लगती है। महाराज अकबर को बीरबल पर पूरा विश्वास था लेकिन फिर भी उनकी आंखों में नमी थी।

नाचने वाली महिला वहां पहुंचती है। वह सिंहासन की ओर बढ़ ही रही थी, कि बीरबल उसे रोकते हैं और धीरे से कहते है, कि राजा से आपने केवल राज सिंहासन पर हंगने ( गु ) का वचन लिया है, किन्तु हंगते वक्त अगर आपके पेशाब का एक भी कतरा राज सिंहासन पर गिरा तो यह वचन के विरूद्ध होगा और राजा अकबर आपको कोलू में पिलवा देंगे ( सजा देने का एक प्रकार )। 

बीरबल की यह बात सुनते ही महिला की आंखें चार हो गई और वह भयभीत होकर राजा से क्षमा मांगने लगी। राजा अकबर हमेशा की तरह बीरबल से अत्यधिक प्रसन्न हुए।

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बिरबल को “पाद” मारने की सजा

एक दिन राजा अकबर की सभा लग रही थी। वहां बीरबल, मंत्री गण, राजा के साले साहब और रानी भी मौजूद थीं। सभा के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि बीरबल को सभा से निकाल दिया गया। बीरबल ने केवल भरी सभा में  “पाद” मार दिया था। राजा को उनकी पत्नी और साले साहब ने इतना भड़काया की राजा को अपने उदास मन से बीरबल को सभा छोड़ने का आदेश देना पड़ा।

बीरबल को अब महल से निकाल दिया गया था, तो उसने अपनी जगह पर खेती करने की सोची। ठंड का मौसम था, तो बीरबल ने गेहूं की खेती की। ठंड के मौसम में ओस की बूंद गेहूं की छोटी-छोटी हरी पतियों पर ऐसे चमक रही थी, मानों जैसे कोई मोती हो।

राजा अकबर सुबह अपने घोड़े से वहां से गुजर रहे थे, कि उन्हें बीरबल दिखाई दिया। वे बीरबल से पूछने लगे कि आज-कल क्या कर रहे हो। बीरबल ने थोड़ा दिमाग लगाया और राजा से बोले कुछ नहीं महाराज सभा से निकाल देने के बाद मोतियों की खेती की है।

गेहूं की पतियों पर ओस की बूंदे

राजा ने खेत की ओर देखा ओस की बूंद पतियों पर सच में मोती दिख रही थी। राजा देखते ही अपना संतुलन खो बैठा । वे सच में ही ओस की बूंद को मोती समझ बैठा राजा सोचने लगा अगर बीरबल मोती किसी अन्य राजा को बेचता है तो यह मुझ से भी अमीर हो जाएगा । राजा ने बीरबल से कहां, बीरबल ये मोती तुम मुझे बेच देना । बीरबल ने हां कर दिया ।

लेकिन राजा को इतने सारे मोती देखकर कहां नींद आने वाली थी। उसने बीरबल को महल में बुलाया और बीरबल से मोतियों का राज जानने की कोशिश की। बीरबल भी चालाक लोमड़ी की तरह शतीर था। उसे तो पता था यह कोई मोती नहीं केवल ओस की बूंदे है, लेकिन यह राजा को सबक सिखाने का रास्ता था।

बीरबल ने कहां महाराज ये खेती हर जगह नहीं हो सकती इसके लिए आपको वह महल तुड़वाना पड़ेगा जो आपने रानी के लिए बनवाया है। केवल वहीं इसकी खेती हो सकती है। राजा ने सोचा कि इतने सारे मोतियों में तो रानी के लिए बाद में दस महल बनवा दूंगा। राजा ने हां कर दिया।

अगले ही दिन महल को तुड़वा दिया गया मिट्टी को एकदम उपजाऊ किया गया। बीरबल ने खेती शुरू कर दी और थोड़े दिन बाद ही खेती की कटाई का आदेश दिया जैसे ही गेहूं की पत्तियां थोड़ी बड़ी हुई ओस की बूंद जमना शुरू हो गई। राजा अकबर अत्यधिक प्रंसन्न हो गए।

जब कटाई के लिए बीरबल को बुलाया गया तो वहां पूरा गांव ही मौजूद था। बीरबल राजा से कहते है महाराज अब आप एक मोती तोड़ सकते है। जैसे ही अकबर एक मोती तोड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाते है। बीरबल उन्हें रोक देते है और कहते है महाराज क्षमा करें किन्तु आप ये मोती तभी तोड़ सकते है अगर आपने आज तक “पाद” ना मारा हो वरना ये मोती पानी की बूंद बन जाएगा। राजा हैरान हो गए और अपना हाथ पीछे कर लिया।

बीरबल ने वहां मौजूद सभी मंत्री गण, रानी, राजा के साले साहब और पूरे गांव को मोती तोड़ने के लिए कहां किंतु शर्त यही थी, केवल वही मोती तोड़ सकता है, जिसने आज तक  “पाद” ना मारा हो वरना मोती पानी की बूंद बन जाएगा।

इतनी भीड़ में किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि कोई मोती तोड़ सके।  सभी अपने पैर पीछे खींचने लगे। तभी राजा और रानी को अपनी गलती का अहसास होता है और वे बीरबल से माफी मांगते हुए सभा में आने के लिए कहते है।

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घी के मटके : पैसों की बोरी

एक दिन राजा अकबर और रानी में जबरदस्त बहस चल रही थी। रानी अपने भाई के आगे बीरबल की उपलब्धियां देख जलने लगी थी। बीरबल राजा के प्रिय नवरत्न में से एक थे किन्तु रानी का भाई उस सूची में शुमार भी नहीं था। बस इसी बात को लेकर दोनों में बहस चल रही थी की बीरबल और उनके भाई में ज्यादा काबिल कौन है।

अकबर बीरबल की कहानीयां

तभी राजा और रानी दोनों में ज्यादा काबिल कौन है जानने के लिए उन्हें एक कार्य देते है। राजा तो जानते थे कि बीरबल का कोई जवाब नहीं किन्तु रानी की संतुष्टि के लिए वह इस निर्णय पर पहुंचते है।

पहले रानी के भाई को बुलाया जाता है। राजा उसे तीन खाली बोरी एक पेन – कॉपी और एक रस्सी देते है और उसे कहते है मुझे ये तीन खाली बोरी श्याम तक पैसों की भरी चाहिए। राजा के साले साहब बाज़ार जाते है और वहा बिना दिमाग लगाए पैसों की बोरी भरने के लिए दुकानदारों से छीना – झपटी पर उतर आते है। जिसका परिणाम यह हुआ कि ना तो वह पैसे ला पाया और उसके इस दुर्वाहर की खबर राजा तक पहुंच जाती है।

राजा के पूछने पर वह बोलता है महाराज यह कार्य असंभव है बिना किसी व्यापार के कोई पागल ही होगा जो मुझे पैसों की बोरी भर कर देगा। बिना छीना – झपटी के मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। राजा अकबर रानी से कहते है अब देखना रानी मैं यही कार्य बीरबल को देता हूं। रानी को अपने भाई की दुर्दशा देख कर नहीं लगा कि बीरबल भी यह कार्य कर पाएगा।

राजा ने बीरबल को बुलाया और वहीं आयाम देकर कार्य सौंप दिया। बीरबल खाली बोरियों के साथ बाजार पहुंच जाता है और राजा की दी हुई रस्सी से सड़क नापने लग जाता है और उसे साथ ही साथ कॉपी में लिखता जाता है। सभी दुकानदार बीरबल की इस हरकत को देख रहे थे। वे बीरबल के पास आते है और पूछते है की आप यह क्या कर रहे है।

बीरबल थोड़े कड़े स्वर में बोलते है राजा का आदेश है यह सड़क चौड़ी की जाए। महाराज का काफिला यहां से गुजर नहीं पाता तो सड़क के दोनों तरफ की दुकानें तोड़ी जाएगी। सभी दुकानदार इस बात को सुनकर सफेद हो गए। उन्हें अपनी दुकानों की फिक्र होने लगी जो खासी कमाई कर रही थी।

उन्होंने बीरबल को कुछ ले देकर अपनी दुकानें बचाने के लिए कहा। बस बीरबल को इसी मौके का इंतजार था उसने एक – एक दुकानदार से पचास – पचास हजार रकम वसूली जिसके परिणाम स्वरूप श्याम तक तीन खाली बोरियां पैसों की भर गई। बीरबल ने उन्हें राजा को सौंप दिया रानी भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाई।

लेकिन रानी को संतुष्टि कहा थी। उसने राजा से एक ओर कार्य देने के लिए कहा राजा ने उसके लिए भी हां कर दी।

पहले रानी के भाई को ही बुलाया गया अब कार्य था बाजार से खाली मटको को घी में भिगोकर लाना था वो भी बिना पैसे के। राजा के साले साहब मटके लेकर बाजार पहुंच जाते है सभी दुकानदारों से मटके घी में भिगोने के लिए कहते वह भी बिना पैसे के। सभी दुकानदार उसे पागल समझते और उसे वहां से भगा देते है।

वह मटके लेकर महल पहुंचता है। राजा के पूछने पर वह कहता है महाराज ये तो कोई पागल ही होगा जो बिना पैसे के मेरे मटके घी में भिगो कर देगा। मैं अपने कार्य में असमर्थ हुआ।

फिर वही कार्य राजा बीरबल को देते है । बीरबल मटके लेकर बाजार पहुंचता है बिना घी का भाऊ पुछे ही घी खरीद लेता है दुकानदार बीरबल के चारो मटके घी से भर कर पैसे की बोलता है। बीरबल कितने पैसे हुए भाई? दुकानदार अपना भाऊ बताता है। बीरबल थोड़ा चोककर बोलता है बाप रे इतना महंगा नहीं भैया मुझे नहीं चाहिए मटके खाली कर लो।

दुकानदार ने मटके खाली कर दिए लेकिन मटके घी में भीग चुके थे। बीरबल ने महल जाकर राजा के सामने घी से भीगे हुए मटके रख दिए जिसे देखकर रानी और उनके भाई की आंखे खुली की खुली रह गई।रानी राजा अकबर से समा मांगने लगी कि बीरबल की बुद्धि के आगे सभी निरस्त है।

सिख:- बुध्दी के बल से किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है बस इंसान को धैर्य रखना चाहिए।

 अकबर बीरबल की अनसुनी कहानीयां आपको कैसी लगीं? कृपया कमेंट के माध्यम से बताएं।

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